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अचानक वजन घटे तो न करें नजरअंदाज हो सकता है जानलेवा, गर्भवती महिलाएं भी रहें सतर्क

Sat, 25 May 2019 04:41 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Sat, 25 May 2019 04:41 PM IST
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अचानक वजन बढ़ने लगे या त्वचा रूखी या सूखने लगे तो इसे नजरअंदाज न करें। थकान महसूस होना या जरूरत से ज्यादा नींद आना हाइपो थायरायडिज्म के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में बिना देरी किए डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए। यह जानकारी लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ व थायरायड स्पेशलिस्ट डॉ. मनीष गुच्च ने शुक्रवार को विश्व थायराइड दिवस की पूर्व संध्या पर दी। उन्होंने बताया कि हाइपोथायराइडिज्म एक हार्मोनल बीमारी है, जो थायरायड ग्रंथि से थायरायड हार्मोन के अपर्याप्त उत्पादन के कारण होती है। यह बीमारी तेजी से फैल रही है, संस्थान की ओपीडी में सप्ताह भर में 80 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। समय रहते इसका इलाज न कराया जाए तो दिल के चारों ओर पानी बढ़ जाता है और यह जानलेवा भी हो सकता है।

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वजन अचानक घटने लगे तो इसे नजरअंदाज करना भी जानलेवा हो सकता है। डॉ. मनीष ने बताया कि वजन तेजी से घटने लगे, हाथ-पैर कांपने लगें, व्यवहार व आंखों में बदलाव (आंखें बाहर की ओर निकलने लगे) हो तो ये लक्षण हाइपर थायरायडिज्म के हो सकते हैं। ऐसे लोगों को ध्रूमपान करने वालों से दूरी बनाकर रखना चाहिए। ये लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टरी सलाह लें। ऐसे मरीजों में लापरवाही बरतने पर दिल का दौरा पड़ने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। थायरायड ऑटो इम्यून डिजीज है। वैसे तो यह अधिकतर आयोडीन की कमी, जन्म के समय से (कंजनाइटल हाइपोथायराइडिज्म) या संक्रमण इसका प्रमुख कारण हैं। आज की लाइफस्टाइल और प्रदूषण भी इस बीमारी को बढ़ाने में  जिम्मेदार है। इससे बचाव को खाने में आयोडीन का इस्तेमाल के साथ बाहर के खाने से दूरी और नियमित व्यायाम बेहद जरूरी है।

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डॉ मनीष - फोटो : amar ujala

गर्भावस्था में थायरायड शिशु के मानसिक विकास के लिए खतरा

डॉ. मनीष ने बताया कि थायरायड की समस्या गर्भावस्था के दौरान ज्यादा खतरनाक हो जाती है। इससे गर्भपात, प्रीमैच्योर डिलिवरी व प्री-एक्लेंप्शिया का खतरा कहीं ज्यादा बढ़ जाता है। इससे जच्चा-बच्चा की मौत भी हो सकती है। गर्भावस्था के दौरान इसका इलाज न किया जाए तो शिशु का मानसिक विकास बुरी तरह प्रभावित होता है।

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अमरजीत यादव - फोटो : amar ujala

नियमित योगाभ्यास से संतुलित कर सकते हैं बीमारी

स्थान विभाग के प्रवक्ता व योग विशेषज्ञ अमरजीत यादव ने बताया कि थायरायड हार्मोन संतुलित करने को यौगिक चिकित्सा कारगर है। रोजाना धनुरआसन, सूर्य नमस्कार, उड्यांग और जालंधरबंद आसन से बहुत जल्द इससे छुटकारा मिल सकता है। थायरायड के लिए कुंजल क्रिया, उज्जाई प्राणायाम, वीरासन भी उपयोगी है। तनावमुक्त व प्राकृतिक खानपान के साथ योगाभ्यास कर इस बीमारी से हमेशा के लिए निजात मिल सकती है।

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डॉ सुनीत कुमार तिवारी - फोटो : amar ujala

जूस और धनिया का पानी सबसे असरदार

केजीएमयू के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. सुनीत कुमार तिवारी ने बताया कि हाइपोथायरायडिज्म या हाइपरथायरायडिज्म के लिए सबसे ज्यादा अप्राकृतिक भोजन का सेवन जिम्मेदार है। बाहरी और पके खाने के बजाए फलों का जूस और सलाद का सेवन किया जाता रहे तो इस बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है। वहीं, प्राकृतिक उपचार से इस बीमारी का इलाज संभव है। थायरायड के मरीजों को ज्यादा से ज्यादा फलों का जूस पीना चाहिए। साथ ही अंकुरित अनाज लेना चाहिए। रात में खड़ी सूखी धनिया को भिगोकर सुबह उबालकर इसका पानी पीने से थायरायड पूरी तरह संतुलित हो सकता है। अधिक समस्या हो तो आयुर्वेदिक इलाज से इसे दो से 3 माह में पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

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