अवध आत्मीय है। यह अपनाता है। अपनत्व दिखाता है। केंद्रीय राजनीति के दरवाजे खोलता है तो सत्ता के शीर्ष तक भी पहुंचाता है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी व स्व. अटल बिहारी वाजपेयी तक की फेहरिस्त लंबी है। इन्हें आम से खास अवध ने ही बनाया। कद को भी कद्दावर बनाया। प्रस्तुत है श्रीकांत मिश्र की रिपोर्ट...।
Awadh: अवध में छाए रहे बाहरी... अटल से लेकर इंदिरा तक यहां की जमीन ने इन नेताओं को बनाया कद्दावर
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नानाजी देशमुख: अविभाजित गोंडा का हिस्सा रही बलरामपुर सीट से
नानाजी देशमुख ने 1977 में प्रतिनिधित्व किया। चंडिकादास अमृतराव देशमुख (पूरा नाम) की ख्याति नानाजी के रूप में रही। वह मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले थे।
- नानाजी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण स्वावलंबन के क्षेत्र में काम किया। गोंडा-बलरामपुर सीमा पर जयप्रभा ग्राम उनकी कर्मस्थली रही। भारत सरकार ने 2019 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से नवाजा। पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने उन्हें केंद्रीय कैबिनेट मंत्री की पेशकश की, लेकिन नानाजी ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनाव में नानाजी ने बलरामपुर लोकसभा क्षेत्र से भारी अंतर से जीत हासिल की।
राजनाथ सिंह: विदेश में भी नामचीन विजय लक्ष्मी पंडित, प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की रक्तसंबंधी व फ्रीडम फाइटर श्योराजवती नेहरू और मंत्री फिर राज्यपाल रहीं शीला कौल को लखनऊ की जनता ने सांसद बनाया।
- साल 1991 की रामलहर में यहां से सांसद चुने जाने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने लगातार पांच चुनावों में जीत दर्ज की। हर दफा मार्जिन सुकून का संदेश देता रहा। यहीं से जीतने के बाद वाजपेयी को प्रधानमंत्री बनने का अवसर भी मिला। 2014 और 2019 में राजनाथ ने इसे अपना राजनीतिक ठिकाना बनाया। दोनों बार वह केंद्र में मंत्री बने। राजनाथ मूल रूप में चंदौली के रहने वाले हैं।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पत्रकार रहे फिरोज गांधी 1952 और 57 के आम चुनाव में संसद भवन में रायबरेली की आवाज बने।
- वर्ष 1967 और 71 में रायबरेली ने इंदिरा गांधी को सांसद के रूप में चुना। मगर 1977 की सरकार विरोधी लहर में उन्हें जनता पार्टी के राजनारायण से शिकस्त खानी पड़ी। 1980 में वह फिर से रायबरेली का प्यार पाने में कामयाब रहीं। समय बीता अरुण नेहरू, शीला कौल के बाद सतीश शर्मा ने इस सीट का दर्द संसद में साझा किया। साल 2004 से लगातार सोनिया गांधी यहां से सांसद हैं।
कांग्रेस के किले के रूप में प्रख्यात अमेठी सीट पर पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी ने वर्ष 1980 के चुनाव में जीत दर्ज की। उनके निधन के बाद 81 में हुए उपचुनाव में पायलट राजीव गांधी की पॉलिटिक्स के साथ-साथ संसद में भी इंट्री होती है।
- यह सिलसिला 1984, 89 व 91 में जारी रहा। इसके बाद सोनिया गांधी और फिर राहुल गांधी ने अमेठी की शान बरकरार रखी। 2019 के आम चुनाव में स्मृति इरानी से राहुल को हार का सामना करना पड़ा। राहुल से लेकर स्मृति तक की गिनती परदेशियों में ही होती है।