{"_id":"5ca345f4bdec2214046f021b","slug":"know-about-chandra-shekhar-azad","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"जब चंद्रशेखर आजाद ने लड़की की शादी के लिए दिए रुपये और कागज पर लिखा ये भावुक संदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जब चंद्रशेखर आजाद ने लड़की की शादी के लिए दिए रुपये और कागज पर लिखा ये भावुक संदेश
Tue, 02 Apr 2019 05:04 PM IST
ishwar ashish
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 02 Apr 2019 05:04 PM IST
विज्ञापन
chandra shekhar azad
काकोरी कांड में फरार चंद्रशेखर आजाद लखनऊ के जिस जर्जर मकान में घुसे उसमें एक वृद्ध महिला मिलीं। आजाद से बातचीत के दौरान वृद्धा को खांसी आ गई तो ऊपर कमरे में पढ़ रही वृद्धा की बेटी नीचे उतरने लगी। आजाद एक कोने में छिप गए।
विज्ञापन
युवती ने महिला की पीठ सहलाई तो खांसी रुकी। आजाद को न देखकर वृद्धा बोली, ‘वह कहां गया अभी तो यहीं था। मुझसे बातें कर रहा था।’ युवती को लगा कि मां की तबियत ज्यादा खराब हो गई और वह रोने लगी। तभी आजाद कोने से निकलते हुए बोले, ‘मैं तो यहीं हूं।’
विज्ञापन
युवती ने पूछा, ‘यह कौन हैं?’ वृद्धा ने परिचय कराते हुए आजाद के लिए खाना मंगाया। बरतानिया हुकूमत में खुफिया विभाग में काम करने वाले धर्मेंद्र गौड़ ने संस्मरण में लिखा है, ‘वृद्धा ने आजाद से कहा, ‘यह मेरी बेटी कल्पना है। संस्कृत से एमए कर रही है। साथ ही 20 रुपये पर ट्यूशन पढ़ाती है, जिससे घर का खर्च चलता है।
विज्ञापन
Trending Videos
आजाद युवती से बोले- संसार में कोई काम कठिन नहीं है
इसकी शादी भी करनी है। लड़का है, लेकिन पैसा नहीं।’ तभी आजाद खड़े हुए और कागज पर लिखकर अटैची में कुछ रखते हुए बोले, ‘संसार में कोई काम कठिन नहीं है। मन लगाकर पढ़ो। संस्कृत अच्छा विषय है। प्रथम श्रेणी लाना है। मैं फिर आऊंगा और यह रहा तुम्हारे प्रथम श्रेणी में आने का पेशगी इनाम।’
यह कहकर वह वृद्धा के पैर छूकर चले गए। कल्पना ने अटैची खोली तो वह रुपयों से भरी थी और एक कागज पर लिखा था, ‘यह तुच्छ भेंट बहन कल्पना की पढ़ाई और विवाह के लिए। साथ ही मां की चरण सेवा के लिए।’ वृद्धा, आजाद को रोकने के लिए बाहर आई, लेकिन तब तक चंद्रशेखर आजाद काफी दूर गली के मोड़ पर मुड़कर गायब हो चुके थे।
यह कहकर वह वृद्धा के पैर छूकर चले गए। कल्पना ने अटैची खोली तो वह रुपयों से भरी थी और एक कागज पर लिखा था, ‘यह तुच्छ भेंट बहन कल्पना की पढ़ाई और विवाह के लिए। साथ ही मां की चरण सेवा के लिए।’ वृद्धा, आजाद को रोकने के लिए बाहर आई, लेकिन तब तक चंद्रशेखर आजाद काफी दूर गली के मोड़ पर मुड़कर गायब हो चुके थे।