लखनऊ: काशी-महाकाल एक्सप्रेस का ढोल नगाड़े से हुआ स्वागत, भोले बाबा वाली सीट का रहा क्रेज, तस्वीरें
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गुरुवार को वाराणसी इंदौर काशी महाकाल एक्सप्रेस वाराणसी से आठ मिनट देरी से छूटी और सुल्तानपुर के रास्ते समय से पहले ही शाम 6.57 बजे चारबाग पहुंच गई। महज चार घंटे में ही ट्रेन ने वाराणसी से 283 किमी की दूरी पूरी कर ली। बता दें कि ट्रेन हफ्ते में दो दिन मंगलवार व गुरुवार को लखनऊ के रास्ते रवाना होगी, जबकि रविवार को इलाहाबाद-कानपुर रूट से चलाई जाएगी। पूरी ट्रेन थर्ड एसी बोगियों की है। ट्रेन शुक्रवार सुबह यात्रियों को उज्जैन पहुंचाएगी।
पहला सफर मुनाफे का रहा
महाकाल एक्सप्रेस का पहला सफर मुनाफे का रहा। इसकी सारी सीटें फुल रहीं। ऐसे में आईआरसीटीसी के चीफ रीजनल मैनेजर अश्विनी श्रीवास्तव ने ट्रेन के सफल होने का दावा किया है। नौ बोगियों वाली ट्रेन में सिर्फ थर्ड एसी है। इसकी क्षमता 648 सीटों की है और पहले दिन 759 लोगों ने टिकट बुक किए। इसमें वाराणसी से 361, सुल्तानपुर से 29, लखनऊ से 178, कानपुर से 115, उज्जैन से दो और झांसी से 15 यात्रियों ने टिकट बुक कराए।
खोला गया करंट काउंटर
यात्रियों की सुविधा के लिए आईआरसीटीसी की ओर से चारबाग रेलवे स्टेशन के जनरल टिकट घर की ओर पूछताछ काउंटर के पास करंट काउंटर भी खोला गया। जहां से चार्ट बनने के बाद से लेकर ट्रेन छूटने के पांच मिनट पहले तक टिकट की सुविधा मिलेगी।
भोले बाबा वाली सीट का रहा क्रेज
ट्रेन की बोगी संख्या बी-5 में 64 नंबर सीट गत16 फरवरी को ट्रेन की औपचारिक शुरुआत पर भगवान भोलेनाथ के लिए अस्थायी रूप से रिजर्व की गई, जहां मंदिर भी बनाया गया था। यात्रियों में इस सीट को लेकर खासा क्रेज देखने को मिला। हालांकि जानकारों के मुताबिक अब ट्रेन के रसोईयान में महादेव स्थायी रूप से विराजेंगे। आईआरसीटीसी अधिकारियों ने यह भी बताया कि ट्रेन में फिलहाल शाकाहारी खाने की व्यवस्था होगी। यात्रियों की मांग पर नॉनवेज भी शुरू किया जाएगा।