बाराबंकी में रामनगर इलाके के रानीगंज गांववासी छोटेलाल के घर के बाहर का मंजर बहुत दर्दनाक था। पेशे से सफाईकर्मी छोटेलाल के परिवार पर कहर टूट पड़ा था। उनके घर के बाहर गमगीन लोगों का जमावड़ा था, दो जवान बेटों की लाश रखी थी। एक दरोगा सफेद कपड़ा लाकर लाशों को लपेटने लगा। बदनसीब मां से ये देखा नहीं गया। दहाड़े मारकर शव से लिपट गईं और दरोगा को ऐसा करने से रोकने लगी। रोते बिलखते उनकी आवाज बैठ गई। बार-बार बस यही कह रहीं थीं ‘मेरे लाल को न ले जाओ’।
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एक ही परिवार के चार लोगों की मौत
- फोटो : अमर उजाला
छोटेलाल के घर का एक छोटा सा दालान, एक कोठरी और उसके पीछे आंगन का कुछ हिस्सा छाया हुआ है जिसमें वे पत्नी, छह बेटों, एक बहू और दो पोतियों के साथ रहते थे। सोमवार को दिन तक सब कुछ सामान्य था। रोजाना की तरह छोटेलाल काम से वापस लौटकर आए। बड़ा बेटा रमेश (42) भी सफाईकर्मी है और जिस स्कूल में वह काम करता है वहां छुट्टी होने की वजह से वह भी घर पर था।
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जहरीली शराब
- फोटो : अमर उजाला
बाकी के दो बेटे मुकेश (35) और सोनू (30) भी वहां मौजूद थे। पिता और तीनों बेटों ने घर से कुछ दूर मुख्य सड़क पर देशी शराब के सरकारी ठेके से शराब की दो बोतलें खरीदीं। वे पहले भी कई बार ऐसा कर चुके थे, लिहाजा उन्हें किसी अनहोनी की आशंका नहीं थी। शराब पीने के कुछ देर बाद इन चारों को चक्कर आने लगे और पेट दर्द होने लगा।
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एक ही परिवार के चार लोगों की मौत
- फोटो : अमर उजाला
सोमवार शाम से मंगलवार सुबह तक इस परिवार में एक-एक कर चार लोगों का सांसें थम गईं। सबसे पहले रमेश और छोटेलाल की हालत गंभीर हुई और कुछ ही देर में उसकी सांस उखड़ गई। इसके बाद रमेश की दशा बिगड़ी। उसे लोग पास के अस्पताल तक ले गए पर वहां पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया था।
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सोनू (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार सुबह तक मुकेश और सोनू ने भी दम तोड़ दिया। एक ही परिवार में एक साथ चार लोगों की मौत होने पर गांव में अफरातफरी मच गई। आसपास के लोग वहां एकत्र हो गए। सभी के जेहन में बस एक ही सवाल था कि अब परिवार का क्या होगा?