{"_id":"66949278c2f12546c903b60a","slug":"flood-in-up-experts-in-disaster-management-sector-suggested-measures-to-reduce-impact-of-floods-see-photos-2024-07-15","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"UP Flood News: बारिश... बाढ़ और बर्बादी की अंतहीन दास्तां पर कैसे बंधेगा बांध? बोरियों में रेत रोकेगा कटान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP Flood News: बारिश... बाढ़ और बर्बादी की अंतहीन दास्तां पर कैसे बंधेगा बांध? बोरियों में रेत रोकेगा कटान
Mon, 15 Jul 2024 01:28 PM IST
शाहरुख खान
विनीत चतुर्वेदी, अमर उजाला, लखनऊ
विनीत चतुर्वेदी, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 15 Jul 2024 01:28 PM IST
विज्ञापन
Flood in UP
- फोटो : अमर उजाला
Flood in Uttar Pradesh: जंगलों की कटान और अंधाधुंध विकास के कारण अब हर मौसम अपना चरम दिखा रहा है। कभी भीषण गर्मी तो कभी भयंकर सर्दी जीना मुहाल कर रही है। फिलहाल, बारिश और बाढ़ ने हाल बेहाल कर रखा है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिमोत्तर राज्य समेत देश के कई राज्यों के हजारों गांव बाढ़ की चपेट में हैं।
Flood in UP
- फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला ने अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों से बात कर बाढ़ का असर कम करने के उपाय जाने। पर्यावरणविद् राजीव नयन बहुगुणा के मुताबिक, बाढ़ से बचाव के लिए नदियों के तटबंध में सीमेंट का इस्तेमाल ठीक नहीं है। ये बहाव तेज कर देता है। इसी को ध्यान में रखकर टिहरी डैम में भी सीमेंट के बजाय मिट्टी, पत्थर का इस्तेमाल ज्यादा किया गया है। वहीं, नदी का घुमावदार बहाव बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करेगा।
Flood in UP
- फोटो : अमर उजाला
नदियों के किनारे लगाएं बांस
तटों के कटान को रोकने के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि जैसे समुद्र के किनारों पर मैंग्रोव लगाए जाते हैं, वैसे ही नदियों के किनारों पर बांस, सागौन, जामुन, साल के पेड़ लगाएं। उदाहरण दिया, भूटान हिमालयी नदियों के दायरे में होने के बाद भी घने जंगलों के कारण बाढ़ की चपेट में आने से बचा रहता है।
तटों के कटान को रोकने के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि जैसे समुद्र के किनारों पर मैंग्रोव लगाए जाते हैं, वैसे ही नदियों के किनारों पर बांस, सागौन, जामुन, साल के पेड़ लगाएं। उदाहरण दिया, भूटान हिमालयी नदियों के दायरे में होने के बाद भी घने जंगलों के कारण बाढ़ की चपेट में आने से बचा रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Flood in UP
- फोटो : अमर उजाला
नदियों के बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्र को चिह्नित करें
वरिष्ठ नदी व बाढ़ विशेषज्ञ डॉ. पीके श्रीवास्तव ने कहा कि लोगों ने नदियों के बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्र (फ्लड प्लेन) पर अतिक्रमण कर गांव बसा लिए। गाइडलाइन है कि जितनी बड़ी नदी, उतना बड़ा फ्लड प्लेन आरक्षित होना चाहिए। भविष्य में बाढ़ से बचने के लिए बचे हुए फ्लड प्लेन को चिह्नित कर अतिक्रमण से बचाएं।
वरिष्ठ नदी व बाढ़ विशेषज्ञ डॉ. पीके श्रीवास्तव ने कहा कि लोगों ने नदियों के बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्र (फ्लड प्लेन) पर अतिक्रमण कर गांव बसा लिए। गाइडलाइन है कि जितनी बड़ी नदी, उतना बड़ा फ्लड प्लेन आरक्षित होना चाहिए। भविष्य में बाढ़ से बचने के लिए बचे हुए फ्लड प्लेन को चिह्नित कर अतिक्रमण से बचाएं।
विज्ञापन
Flood in UP
- फोटो : अमर उजाला
बोरियों में रेत रोकेगा कटान
वरिष्ठ आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ अरुण कुमार मिश्रा ने बताया कि कटान रोकने के लिए पॉर्क्यूपाइन (आरसीसी से बना खास ढांचा) लगाई जाती है। इससे धारा की गति नियंत्रित होती है। रेत से भरी बोरियां सीढ़ी के आकार में लगाने से कटान कम होता है। वहीं, खस का प्रयोग भी किया जाता है। इसकी जड़ें आपस में जुड़कर जाल बना लेती हैं और मिट्टी को बांध लेती हैं। इससे भी कटान कम किया जा सकता है।
वरिष्ठ आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ अरुण कुमार मिश्रा ने बताया कि कटान रोकने के लिए पॉर्क्यूपाइन (आरसीसी से बना खास ढांचा) लगाई जाती है। इससे धारा की गति नियंत्रित होती है। रेत से भरी बोरियां सीढ़ी के आकार में लगाने से कटान कम होता है। वहीं, खस का प्रयोग भी किया जाता है। इसकी जड़ें आपस में जुड़कर जाल बना लेती हैं और मिट्टी को बांध लेती हैं। इससे भी कटान कम किया जा सकता है।