बहराइच व बाराबंकी में बाढ़ से करीब 17 गांव टापू बन गए हैं। गांवों में रास्ते बाढ़ के पानी में बह गए हैं। लोग नावों से सुरक्षित स्थानों की तरफ पलायन कर रहे हैं।
बहराइच में घाघरा नदी का जलस्तर धीरे-धीरे कम होना शुरू हुआ है, लेकिन ग्रामीणों की मुश्किलें अभी भी बरकरार हैं। बाढ़ का पानी भरने से जिले में 12 गांवों के ग्रामीण घरों में फंसे हैं। मुख्य मार्गों पर बाढ़ का पानी भरा है, जिससे आवागमन बाधित है। घर में खाने की किल्लत है। मगर अभी तक पीड़ितों को कोई प्रशासनिक सहायता नहीं मिली है। (बहराइच के गांव गोलागंज में बाढ़ के पानी में डूबा गांव का मार्ग।)
गांवों में पानी भरने की सूचना पर एसडीएम ने शुक्रवार को निरीक्षण किया है। नावें लगाकर गांवों में फंसे ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
घाघरा नदी में नेपाल से आ रहे बरसात के पानी के कारण अचानक जलस्तर तेजी से बढ़ना शुरू हो गया था। लगभग तीन लाख क्यूसेक पानी घाघरा में छोड़ा गया था। (गांव में बाढ़ के बाद सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करते ग्रामीण।)
वहीं, बाराबंकी में उफनाई घाघरा नदी तराई के लोगों की मुसीबत लगातार बढ़ा रही है। सात गांवों को जोड़ने वाले मार्ग नदी की धारा में बह गए हैं। ये गांव टापू बन गए हैं। इससे ग्रामीणों को बाहर निकलने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। इस बीच 73 परिवारों में तिरपाल उपलब्ध कराए गए। (ये दृश्य गांव के मार्ग का है। जहां बच्चे इस तरह सड़क पार कर रहे हैं।)