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एक साथ उठे पांच शव, जिसने भी देखा कलेजा कांप उठा, तस्वीरें

Tue, 27 Oct 2015 09:24 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 27 Oct 2015 09:24 PM IST
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एक साथ उठे पांच शव, जिसने भी देखा कलेजा कांप उठा, तस्वीरें

Five people of Lucknow died in an accident.

मध्य प्रदेश में हादसे के शिकार एक ही परिवार के पांच सदस्यों के शव मंगलवार शाम पौने छह बजे एंबुलेंस से सीधे भैंसाकुंड लाए गए। ताबूत में रखे शव जैसे ही एंबुलेंस से उतारे गए परिवारीजन बिलख पड़े। माहौल मातमी हो गया। सड़क से गुजर रही कारों और बाइकों के ब्रेक अपने आप लग गए। राहगीर भीड़ के बीच से झांकने लगे।


एक साथ उठे पांच शव, जिसने भी देखा कलेजा कांप उठा, तस्वीरें

Five people of Lucknow died in an accident.

नजारा देखते ही कलेजा मुंह को आ गया। एक साथ पांच लाशें और रोते-बिलखते परिवारीजन। एक ने पूछा, ‘क्या हुआ? किसके शव हैं?’ भर्राये हुए गले से किसी ने कहा, ‘एक्सीडेंट...’ आगे के शब्द चीख-पुकार में गुम हो गए।

एक साथ उठे पांच शव, जिसने भी देखा कलेजा कांप उठा, तस्वीरें

Five people of Lucknow died in an accident.

छतरपुर के सागर-कानपुर नेशनल हाईवे में सोमवार शाम करीब चार बजे दर्दनाक हादसे में आलमबाग के सुजानपुरा निवासी व विभूतिखंड स्थित पंजाब नेशनल बैंक के सीनियर मैनेजर आशीष बाजपेयी की पत्नी मानसी (28) और इंदिरानगर सेक्टर 21 निवासी बहन शोभा (45), बहनोई प्रदीप त्रिपाठी (50), भांजा प्रियांशु (17) व भांजी स्वाती (16) की मौत हो गई थी।

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Five people of Lucknow died in an accident.

आशीष, उनकी छह वर्षीय बेटी सम्प्रति और ढाई साल का बेटा मोहनीश बाल-बाल बच गए थे। आशीष ने बताया कि प्रदीप गोमतीनगर स्थित मंडी परिषद के ऑफिस में हेड क्लर्क थे। बुधवार सुबह साढ़े छह बजे प्रदीप अपनी कार से सभी को शिरडी दर्शन कराने ले गए थे। सोमवार शाम लौटते वक्त हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई। शाम करीब सात बजे भैंसाकुंड पर शवों का अंतिम संस्कार किया गया।

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Five people of Lucknow died in an accident.

इससे पूर्व आशीष के सुजानपुरा स्थित घर पर सुबह से ही रिश्तेदारों और परिचितों की भीड़ जुटी रही। घर पर उनके पिता व केकेसी के बीएड विभाग के रिटायर्ड प्रोफेसर ललित बिहारी बाजपेयी, मां गायत्री, महानगर स्थित आईटीसी दफ्तर में काम करने वाले बड़े भाई अखिलेश का हाल बुरा था। रिश्तेदार और आस-पड़ोस के लोग उन्हें सांत्वना देते रहे।

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