नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में घंटाघर पर प्रदर्शन के दौरान लगातार पांच दिन से उपवास कर रहीं दो महिलाओं गुलनाज व रानी की हालत बिगड़ गई। उन्हें आनन-फानन अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इसको देखते हुये सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनका उपवास खत्म करा दिया। इससे पहले दोपहर में कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने घंटाघर पहुंच कर महिलाओं के प्रदर्शन को समर्थन दिया। उधर उजरियांव में भी महिलाओं का प्रदर्शन जारी रहा।
हुसैनाबाद स्थित घंटाघर में चल रहे महिलाओं के शांतिपूर्वक प्रदर्शन के 37वें दिन रविवार को भी काफी संख्या में महिलाएं हाथों में तिरंगा लेकर शामिल हुईं। महिलाओं ने नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ नारे लगाने के साथ देशभक्ति के गीत गाये।
महिलाओं का हौसला बढ़ाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता वंदना मिश्रा, लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति डॉ. रूप रेखा वर्मा, वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस, हसीम फिरोजाबादी, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता महमूद प्राचा घंटाघर पहुंचे। उन्होंने संघर्ष में महिलाओं का साथ देने का वादा किया। वहीं गोमतीनगर उजरियांव के गंज शहीदा कब्रिस्तान के निकट दरगाह परिसर में बीती 19 जनवरी से महिलाओं का प्रदर्शन रविवार को बारिश के बावजूद भी जारी रहा।
पांचवें दिन उपवास समाप्त
गुलनाज बानो व रानी की शाम को हालत बिगड़ने के बाद पूर्व आईजी एसआर दारापुरी, जमाते इस्लामी के प्रदेश सचिव साबिर खान और डॉ. अलीमुल्लाह खान ने महिलाओं को जूस पिलाकर पांचवें दिन उपवास समाप्त कराया।
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प्रदर्शन
- फोटो : amar ujala
गोली चलने से मची अफरातफरी
शाम को घंटाघर परिसर में तालाब के पास दो गुटों मारपीट व गोली चलने से प्रदर्शन में शामिल महिलाएं काफी घबरा गईं। इससे अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया।