{"_id":"5b9b5ad1867a557ed0491622","slug":"facts-of-bhim-army-and-chandrashekhar-azad-ravan","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"दलितों के 'रावण' की ये है कहानी, जेल से बाहर आते ही सरकार से ले लिया मोर्चा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दलितों के 'रावण' की ये है कहानी, जेल से बाहर आते ही सरकार से ले लिया मोर्चा
टीम डिजिटल, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 15 Sep 2018 09:02 AM IST
विज्ञापन
chandrashekhar ravan
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर में जातीय हिंसा के आरोपी भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद 'रावण' को यूपी सरकार ने तय तिथि से 48 दिन पहले रिहा तो कर दिया लेकिन रावन ने जेल से बाहर आते ही भाजपा से मोर्चा ले लिया है। उन्होंने सरकार पर करारा हमला करते हुए कहा कि जब तक भाजपा को सत्ता से उखाड़ नहीं फेंकेंगे तब तक न सोएंगे और न ही सोने देंगे। कहा कि जब तक सहारनपुर से जातिगत शोषण की घटनाएं खत्म नहीं होतीं तब तक हम चुप नहीं बैठेंगे। मैं जेल से काम करने के लिए ही रिहा हुए हूं। आखिर कौन है ये 'रावण', क्या है भीम आर्मी, सरकार के प्रति उनका रवैया ऐसा क्यों है, ये सब जानने के लिए आगे की स्लाइड्स देखें।
फाइल फोटो
दलितों के उत्थान के लिए काम करने वाली भीम आर्मी का गठन वर्ष 2014 में हुआ था। जानकार कहते हैं कि दक्षिण के दलित आंदोलन से ही प्रेरित होकर भीम आर्मी का गठन किया गया। आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन आर्य के साथ मिलकर चंद्रशेखर रावण ने इसकी नींव रखी थी। इस आर्मी का मकसद है शिक्षा के जरिए दलितों और पिछड़ों का विकास करना। उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना। इसी उद्देश्य के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भीम आर्मी दलितों लिए कई स्कूल चला रहे हैं, जहां बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है।
भीम आर्मी
बात मई 2017 की है। सहारनपुर के शब्बीरपुर में कई स्थानों पर हुई जातीय हिंसा में भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने जमकर उत्पात मचाया था। इन लोगों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया था। एक पुलिस चौकी को आग लगा दी थी। इस मामले मे पुलिस ने भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर रावण सहित कई पदाधिकारियों को नामजद करते हुए केस दर्ज कराया था। पुलिस ने आर्मी के सदस्यों सोनू, शिवकुमार, सुधीर और विलास को तो गिरफ्तार कर लिया था लेकिन चंद्रशेखर भाग निकला था।
विज्ञापन
विज्ञापन
भीम आर्मी
कुछ दिनों बाद पुलिस ने रावण को हिमाचाल प्रदेश के डलहौजी इलाके से गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के बाद दलितों ने इसका भारी विरोध किया था। यहां तक कि दो दिन के लिए सहारनपुर में इंटरनेट बंद करना पड़ा था। हाईकोर्ट ने करीब पांच महीने बाद नवंबर 2017 में उसे सभी मामलों में ये कहते हुए ज़मानत दे दी थी कि रावण पर दर्ज सभी मुकदमे राजनीति से प्रेरित लगते हैं लेकिन उसकी रिहाई से पहले ही पुलिस ने उस पर रासुका लगा दिया, जिसके बाद से ही वह सहारनपुर जेल में बंद था।
विज्ञापन
Chandrashekhar Ravan
इसी बीच अन्य आरोपी सोनू, सुधीर और विलास को छह सितंबर को ही रिहा कर दिया गया। जबकि चंद्रशेखर को भी समय से पहले रिहा करने की घोषणा कर दी। गुरुवार देर रात करीब पौने तीन बजे रावण को जेल से रिहा कर दिया। प्रमुख सचिव गृह का कहना है कि रावण की रिहाई का फैसला उनकी मां के प्रार्थना पत्र पर लिया गया है।