{"_id":"5c52a8febdec22738e36a807","slug":"expectation-from-interim-budget","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"बजट 2019: आयकर में छूट, शिक्षा व रोजगार सहित ये हैं जनता की मोदी सरकार से उम्मीदें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बजट 2019: आयकर में छूट, शिक्षा व रोजगार सहित ये हैं जनता की मोदी सरकार से उम्मीदें
Thu, 31 Jan 2019 02:08 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 31 Jan 2019 02:08 PM IST
विज्ञापन
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोकसभा चुनाव की दस्तक के बीच केंद्र की मोदी सरकार एक फरवरी को अपने कार्यकाल का पांचवां बजट पेश करेगी। आम चुनाव के मद्देनजर अंतरिम तौर पर पेश होने वाले इस बजट को लेकर नौकरीपेशा से लेकर आम शहरी तक उम्मीदें संजोए हैं। नौकरीपेशा व कारोबारी वर्ग से जुड़े लोगों को जहां आयकर छूट की सीमा पांच लाख रुपये तक होने की उम्मीद है, वहीं डॉक्टरी पेशे से जुड़े लोग इलाज के साथ ही शोध कार्य के लिए बजट प्रावधान बढ़ाए जाने की उम्मीद कर रहे हैं। गृहिणियां जहां किचन आइटम के साथ घरेलू उपयोग की सामग्री सस्ती करने के लिए जीएसटी दर में कमी लाने की बात कर रही हैं तो युवा वर्ग सुलभ शिक्षा संग रोजगार के पर्याप्त अवसर मुहैया कराने की आस संजोए है। ‘अमर उजाला’ ने अलग-अलग वर्गों की उम्मीदों का जायजा लिया। पेश है रिपोर्ट :
व्यापारी
- फोटो : amar ujala
आयकर छूट की सीमा पांच लाख तक हो
जिस रफ्तार से महंगाई बढ़ी, उसके मुकाबले आयकर छूट की सीमा नहीं बढ़ाई गई। भाजपा ने सत्ता में आने पर आयकर छूट पांच लाख रुपये करने का वादा किया था, जिसे अंतरिम बजट में पूरा करना चाहिए। ऐसी योजना लाई जानी चाहिए जिससे बुनकर, शिल्पकार, चिकन, जरदोजी का काम करने वाले अपने व्यापार को बढ़ा सकें। इनके लिए सब्सिडी का भी प्रावधान किया जाए। राज्य सरकार के टैक्स की दरें कम हों, इसका भी प्रावधान होना चाहिए।
-प्रमोद कुमार अग्रवाल, सैयद महमूदुर्रहमान ‘पम्मू’, दीपक श्रीवास्तव, आबिद अली, उमाशंकर अग्रवाल (व्यापारी)
जिस रफ्तार से महंगाई बढ़ी, उसके मुकाबले आयकर छूट की सीमा नहीं बढ़ाई गई। भाजपा ने सत्ता में आने पर आयकर छूट पांच लाख रुपये करने का वादा किया था, जिसे अंतरिम बजट में पूरा करना चाहिए। ऐसी योजना लाई जानी चाहिए जिससे बुनकर, शिल्पकार, चिकन, जरदोजी का काम करने वाले अपने व्यापार को बढ़ा सकें। इनके लिए सब्सिडी का भी प्रावधान किया जाए। राज्य सरकार के टैक्स की दरें कम हों, इसका भी प्रावधान होना चाहिए।
-प्रमोद कुमार अग्रवाल, सैयद महमूदुर्रहमान ‘पम्मू’, दीपक श्रीवास्तव, आबिद अली, उमाशंकर अग्रवाल (व्यापारी)
सरकारी कर्मचारी
- फोटो : amar ujala
आयकर छूट में बढ़ोतरी से ही फीलगुड
इंदिरा भवन-जवाहर भवन के कर्मचारियों का मानना है कि मोदी सरकार ने जिस तर सवर्ण आरक्षण के लिए आय सीमा आठ लाख रुपये तय की है, उसे देखते हुए अब आयकर छूट की सीमा को भी ढाई लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने पर ही फीलगुड होगा। इसके साथ ही सरकारी कर्मचारी 80सी में छूट की सीमा भी डेढ़ लाख से बढ़ाकर तीन लाख रुपये की जानी चाहिए।
- सुशील कुमार बच्चा, मनीष बाजपेई, सुनील कुमार गिरि, नरेंद्र कुमार, सुनील ( सरकारी कर्मचारी)
इंदिरा भवन-जवाहर भवन के कर्मचारियों का मानना है कि मोदी सरकार ने जिस तर सवर्ण आरक्षण के लिए आय सीमा आठ लाख रुपये तय की है, उसे देखते हुए अब आयकर छूट की सीमा को भी ढाई लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने पर ही फीलगुड होगा। इसके साथ ही सरकारी कर्मचारी 80सी में छूट की सीमा भी डेढ़ लाख से बढ़ाकर तीन लाख रुपये की जानी चाहिए।
- सुशील कुमार बच्चा, मनीष बाजपेई, सुनील कुमार गिरि, नरेंद्र कुमार, सुनील ( सरकारी कर्मचारी)
विज्ञापन
विज्ञापन
युवा
- फोटो : amar ujala
सुलभ शिक्षा संग रोजगार के हों इंतजाम
शैक्षणिक संस्थानों की फीस बढ़ती जा रही है। दूसरी ओर रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं। इसलिए बजट में यह सुनिश्चित किया जाय कि शिक्षा सर्वसुलभ होनी चाहिए। शैक्षिक संस्थानों में संसाधन और शिक्षकों की कमी दूर की जाए। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद युवा रोजगार न रहें, यह सरकार की जिम्मेदारी है। इसलिए बजट में रोजगार देने के लिए व्यवस्था होनी चाहिए।
-प्रकाश पांडेय, पुष्पेंद्र कुमार सिंह, वैभव पांडेय, यश मिश्रा और अंशुमान मिश्रा (युवा)
शैक्षणिक संस्थानों की फीस बढ़ती जा रही है। दूसरी ओर रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं। इसलिए बजट में यह सुनिश्चित किया जाय कि शिक्षा सर्वसुलभ होनी चाहिए। शैक्षिक संस्थानों में संसाधन और शिक्षकों की कमी दूर की जाए। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद युवा रोजगार न रहें, यह सरकार की जिम्मेदारी है। इसलिए बजट में रोजगार देने के लिए व्यवस्था होनी चाहिए।
-प्रकाश पांडेय, पुष्पेंद्र कुमार सिंह, वैभव पांडेय, यश मिश्रा और अंशुमान मिश्रा (युवा)
विज्ञापन
डॉक्टर
- फोटो : amar ujala
इलाज के साथ शोध के लिए बढ़े बजट प्रावधान
चिकित्सा क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाए। जांच सुविधाओं, इंप्लांट, दवाओं के लिए बजट प्रावधान बढ़ाया जाना जरूरी है। शोध के लिए भी अतिरिक्ति बजट होना चाहिए। इससे चिकित्सक नई-नई तकनीक से वाकिफ होंगे। भारत में अभी भी दंत चिकित्सा को लेकर जागरूकता की कमी है। दंत चिकित्सा के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान हो तो मरीजों को काफी राहत मिलेगी।
-डॉ. लक्ष्य कुमार यादव, डॉ. मयंक सिंह, डॉ. भास्कर, डॉ. अभिजीत, डॉ. सौम्या, केजीएमयू (डॉक्टर)
चिकित्सा क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाए। जांच सुविधाओं, इंप्लांट, दवाओं के लिए बजट प्रावधान बढ़ाया जाना जरूरी है। शोध के लिए भी अतिरिक्ति बजट होना चाहिए। इससे चिकित्सक नई-नई तकनीक से वाकिफ होंगे। भारत में अभी भी दंत चिकित्सा को लेकर जागरूकता की कमी है। दंत चिकित्सा के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान हो तो मरीजों को काफी राहत मिलेगी।
-डॉ. लक्ष्य कुमार यादव, डॉ. मयंक सिंह, डॉ. भास्कर, डॉ. अभिजीत, डॉ. सौम्या, केजीएमयू (डॉक्टर)