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देवोत्थानी एकादशी आज, सहालग का दौर शुरू, 25 से 13 तक की लग्न में बंपर शादियां
Wed, 25 Nov 2020 02:12 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 25 Nov 2020 02:12 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
देवशयनी एकादशी (एक जुलाई) से सोने गए देवता बुधवार से जाग जाएंगे। इसी के साथ सहालग का दौर शुरू हो जाएगा। इस बार कोविड प्रोटोकॉल के तहत सात फेरे होंगे। लखनऊ के गोमती नगर निवासी आचार्य प्रदीप कुमार और राजाजीपुरम निवासी पंडित राम विजय शास्त्री ने बताया कि 25 नवंबर की सुबह 4 बजकर 21 मिनट से शुरू एकादशी का मान 26 की सुबह 6 बजकर 4 मिनट तक रहेगा।
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- फोटो : अमर उजाला
देवउठनी एकादशी का पूजन 25 नवंबर को करना उत्तम रहेगा। इस दिन पूजा पाठ करने के साथ दान करना चाहिए। शास्त्रों के मुताबिक दशमी बेधी एकादशी का त्याग करते हुए एकादशी का व्रत 26 नवंबर को करना उत्तम रहेगा। गांधारी ने दशमी बेधी एकादशी का व्रत किया था, उसके बाद से ही शास्त्रों के मुताबिक इसका त्याग करने को कहा गया है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : pixabay
इस साल बची सहालग
नवंबर : 25, 26, 29 और 30 नवंबर
दिसंबर : 1, 2, 6, 7, 8 9 10, 11 और 13 दिसम्बर
नवंबर : 25, 26, 29 और 30 नवंबर
दिसंबर : 1, 2, 6, 7, 8 9 10, 11 और 13 दिसम्बर
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
तुलसी विवाह और व्रत का प्रावधान
ज्योतिषी एसएस नागपाल कहते हैं कि इस दिन भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और तुलसी की विशेष पूजा की जाती है। तुलसी का विवाह शालिग्राम से किया जाता है।
ज्योतिषी एसएस नागपाल कहते हैं कि इस दिन भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और तुलसी की विशेष पूजा की जाती है। तुलसी का विवाह शालिग्राम से किया जाता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
व्रती महिलाएं सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर आंगन में चौक लीपकर भगवान विष्णु के चरणों को कलात्मक रूप से अंकित करती है। तुलसी विवाह उत्सव भी प्रारंभ होता हैं। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है।