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बदल गया नजरिया: कोरोना की त्रासदी ने समझाई रिश्तों की अहमियत, तलाक की दहलीज से लौटे 65 दंपती

Tue, 21 Sep 2021 03:55 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 21 Sep 2021 03:55 PM IST
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couples understand the value of ralations during corona period.
कोरोना ने हमसे बहुत कुछ छीना, इस खोने के दर्द ने जिंदगी व रिश्तों की अहमियत भी समझा दी है। इसका उदाहरण हैं ऐसे 65 दंपती, जो एक-दूसरे की शक्ल तक देखने के लिए तैयार नहीं थे और अलग होने का फैसला कर चुके थे। कोरोना काल में जिस तरह लोगों से अपने बिछड़ते चले गए, उस दुख ने इन्हें जिंदगी के प्रति नया नजरिया दिया। रिश्तों की अहमियत का अहसास होने पर इन्होंने तलाक का इरादा बदल दिया। अब ये हंसी-खुशी साथ रहने के लिए तैयार है।


इसे संभव किया है 181 वन स्टॉप सेंटर की टीम ने। तीन से चार काउंसिलिंग के बाद टीम के सदस्यों ने ‘कल हो न हो’ के फलसफे को समझाकर इन परिवारों को टूटने से बचा लिया।

पत्नियों को पीटने में डॉक्टर, इंजीनियर आगे
काउंसिलर सोनल श्रीवास्तव बताती हैं कि कोरोना काल में घरेलू हिंसा बहुत तेजी से बढ़ी। लगातार मामले आ रहे थे। अप्रैल से अगस्त तक 625 शिकायतें आईं थीं। इनमें 70 फीसदी मामले डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक जैसे पढ़े-लिखे परिवारों के थे।
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खास बात है कि पढ़ी लिखी, नौकरीपेशा महिलाओं के साथ भी घरेलू हिंसा हुई। लॉकडाउन खुलने के बाद जब आमने-सामने की काउंसिलिंग शुरू की तो एक-एक कर सबको बुलाया गया। इनमें से 65 मामलों में रिश्तों की गांठ खोलने में कामयाबी मिली।

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पति-पत्नी दोनों ने माना, कल क्या हो पता नहीं
वन स्टॉप सेंटर की मैनेजर अर्चना सिंह कहती हैं कि आईं शिकायतों में रिश्तों की कड़वाहट इतनी बढ़ गई थी कि ये तलाक की दहलीज पर थे। इनमें 24 वर्ष पुराना दांपत्य था तो छह महीने वाली शादियां भी थीं।

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अर्चना सिंह। - फोटो : अमर उजाला

काउंसिलिंग के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी गलतियों को माना। साथ ही स्वीकारा कि कोरोना ने सिखा दिया कि कब सब खत्म हो जाएगा, पता नहीं। हम लड़ क्यों रहे हैं, किसके लिए ऐसा कर रहे हैं।

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डीपीओ विकास सिंह। - फोटो : amar ujala

हमारी कोशिश कि न बिखरे कोई भी परिवार
डीपीओ विकास सिंह का कहना है कि जिस तरह से घरेलू हिंसा की शिकायतें बढ़ रही हैं, वह चिंता की बात है। हालांकि, काउंसलिंग के बाद परिवार टूटने से बचना सुखद संकेत है। हमारी प्राथमिकता महिलाओं को न्याय दिलाना है, पर परिवार जोड़े रखना भी इसका हिस्सा है।

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