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ये हैं स्पेशल वैलेंटाइन कपल, रिलेशनशिप मजबूत बनाने के लिए इनसे जानिए खास टिप्स

Fri, 14 Feb 2020 04:19 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 14 Feb 2020 04:19 PM IST
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couples shared their memories on valentine day in lucknow
वैलेंटाइन डे कपल - फोटो : अमर उजाला

तुम्हारे साथ खामोश भी रहूं तो बातें पूरी हो जाती हैं... तुम में, तुम से, तुम पर ही, मेरी दुनिया पूरी हो जाती है....। प्यार के नगमे उन्होंने भी गाए, शेर-ओ-शायरी भी पढ़ी, डेटिंग भी की और इजहार-ए-मोहब्बत भी किया। यह सिलसिला कोई एक दो साल नहीं बल्कि 25 से 40 साल से चला आ रहा है। गजब का सामंजस्य है उनमें, कोई कुछ कहे ना भी तो एक -दूसरे की खामोशी को समझ लेते हैं वे। तकरार आज भी होती है और इसे वे जरूरी भी मानते हैं। उनका कहना है कि असली प्यार की निशानी है एक-दूसरे से लड़ाई करना। उनके रिश्ते की खूबसूरती छिपी है एक -दूसरे के प्रति सम्मान में। वैलेंटाइन डे पर  कुछ ऐसी ही दंपती की कहानियां उन्हीं की जुबानी साझा कर रहे हैं हम।

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महेश गोयल और नीलम गोयल - फोटो : अमर उजाला

काम से ब्रेक लें, रिश्तों को मजबूत बनाएं

गोयल ग्रुप के एमडी महेश गोयल और उनकी पत्नी नीलम गोयल को विवाह बंधन में बंधे 29 साल हो चुके हैं। दोनों के मुताबिक, बेहतर तालमेल ही उनके प्यार का आधार है। वे कहते हैं कि हम दोनों एक -दूसरे के कहने से पहले ही दिल की बात समझ लेते हैं। शुरू से ही हमने तय किया था कि चाहें कितना भी व्यस्त क्यों न रहें एक-दूसरे के लिए समय निकाल ही लेंगे। रविवार का दिन हमने इसके लिए तय कर रखा है। महेश कहते हैं कि झगड़े हमारे बीच भी होते हैं और उसे खत्म करने की पहल हर पतियों की तरह मुझे ही करनी होती है। नीलम कहती हैं कि प्यार के साथ झगड़ा भी जरूरी है।
ऐसे बनेंगे रिश्ते मजबूत:  यदि आप भी अपने रिश्तों को मजबूत बनाना चाहते हैं तो काम से ब्रेक जरूर लें और भले ही तीन-चार दिनों के लिए ही सही, कहीं भी बाहर चले जाएं। जहां तक बात वैलेंटाइन डे की है तो दिसंबर से फरवरी तक हमारे यहां जन्मदिन, एनीवर्सरी जैसे दिन आते रहते हैं। ये दो महीने सेलीब्रेशन के हैं।

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अतुल चतुर्वेदी और डॉ उपमा - फोटो : अमर उजाला

एक दूसरे की ताकत हैं हम
अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. उपमा चतुर्वेदी और विद्युत नियामक आयोग के संयुक्त निदेशक अतुल चतुर्वेदी की ‘प्रेम कहानी’ को 30 साल पूरे हो चुके हैं। डॉ. उपमा कहती हैं कि जहां प्यार होता है वहीं त्याग, समर्पण होता है। हमने अपने रिश्ते को इसी से पाला है, तो हुई ना हमारी प्रेम कहानी। नकली प्यार में झगड़े नहीं होते, इसलिए हमें झगड़ने, रूठने-मनाने में भी यकीन है। शुरुआती 10 साल पति की पोस्टिंग बाहर रही, पर हमने दूरी को खुशी-खुशी जिया, तनाव नहीं आने दिया। एक दूसरे की जिम्मेदारियों को मिलकर उठाया।

एक -दूसरे की ताकत बन जाइए बस : डॉ. उपमा बताती हैं कि हमारी इंगेजमेंट हो चुकी थी, मिलना-मिलाना उस दौर में होता नहीं था। एक बार मेरे भाई की तबीयत ज्यादा खराब थी। मेरी हिम्मत मेरा साथ छोड़ रही थी कि तभी दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी, सामने अतुल थे, उनको देख मेरी खोई हिम्मत लौट आई।

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डॉ वीएस नारायण और डॉ अरुणा नारायण - फोटो : अमर उजाला

दोस्त बनकर चलाएं अपनी शादी
लारी कार्डियोलॉजी के हेड डॉ. वीएस नारायण और सिप्सा की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अरुणा नारायण का साथ 45 साल का है। सात फेरे लिए 41 साल का समय पूरा हो चुका है। दोनों के मुताबिक, किसी भी रिश्ते में दोस्ती का भाव जरूरी है। डॉ. वीएस नारायण के मुताबिक, 17 साल की उम्र में हम मिले, साथ पढ़ते थे। ये उम्र का वो दौर होता है, जो सोच को मनचाहा आकार दिया जा सकता है। 30-35 साल की उम्र में सोच आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ चुकी होती है, जिसे बदलना, सामंजस्य बैठाना मुश्किल होता है। शादी तो चलानी ही पड़ती है। गाड़ी स्टेशन पर जब आगे बढ़े तो रास्ते की बाधाएं नहीं देखी जातीं, साथ मिलकर, साथ चलकर उसका हल निकाला जाता है।

हमने अपनी दोस्ती को जिंदा रखा
डॉ. अरुणा कहती हैं कि दो तरफा सम्मान जरूरी है। हम दोनों पढ़ाई में अच्छे थे, प्रपोज करने की जरूरत नहीं पड़ी, एक-दूसरे को समझ लिया और घर जाकर कह दिया। हमने अपने रिश्ते में अपनी दोस्ती को जिंदा रखा है।


 
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राजेश सिंह और सुनीता सिंह - फोटो : अमर उजाला
रिश्ते ऐसे बनाएं कि मोबाइल चेक करने की जरूरत न पड़े
दयाल ग्रुप की डायरेक्टर सुनीता सिंह और एमडी राजेश सिंह ने 28 साल पहले वैवाहिक जीवन में प्रवेश किया था। सुनीता कहती हैं कि बहुत सुलझा और पारदर्शी है हमारा रिश्ता। नोक-झोंक हमेशा होती रही, लेकिन हमारा प्यार एक -दूसरे के सम्मान पर टिका है। प्यार के इजहार की जरूरत तो हमेशा ही होती है और करना भी चाहिए। हम दोनों भी समय-समय पर एक -दूसरे से प्यार जताते रहते हैं। यह हमारा प्यार ही है कि हम एक -दूसरे के साथ ही पूरे हैं। जब साथ होते हैं तो किसी के साथ की जरूरत नहीं होती है।
समझ इतनी होनी चाहिए
सुनीता कहती हैं कि पार्टनर का सम्मान और एक-दूसरे का भरोसा जीतना बहुत जरूरी है। आज की पीढ़ी में मोबाइल फोन सबसे बड़ा अविश्वास पैदा करने का कारण बन चुका है। अपने रिश्ते को ऐसा बनाएं कि कभी एक-दूसरे का फोन चेक करने की जरूरत ही न पड़े। इसके बाद खूब मनाइए वैलेंटाइन डे।
 
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