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बढ़ता स्क्रीनिंग टाइम बच्चों को बना रहा आक्रामक, विशेषज्ञ बोले- खुद को बदलें अभिभावक

Thu, 04 Jun 2020 04:32 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 04 Jun 2020 04:32 PM IST
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Children are becoming aggressive due to increased screening time
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
कहीं आपका बच्चा छोटी-छोटी बातों पर आक्रामक तो नहीं हो रहा। यदि हो रहा है तो सावधान हो जाएं। अभिभावकों और मनोवैज्ञानिकों की मानें तो कोरोना काल में बच्चों में आक्रामकता बढ़ी है। एक तरफ ऑनलाइन पढ़ाई और उसके बाद एक्टिविटी के चलते बढ़ा स्क्रीनिंग टाइम जहां बच्चों के व्यवहार में कई तरह के बदलाव ला रहा है। वहीं, लॉकडाउन में बदली जीवनशैली से आया गुस्सा भी अभिभावक अपने बच्चों पर निकाल रहे हैं। इसके चलते ओपीडी खोलने पर बीमार बच्चों की संख्या बढ़ने का अंदेशा है। चार जून को इंटरनेशनल डे ऑफ इनोसेंट चिल्ड्रेन ऑफ एग्रेशन मनाया जाता है। हालांकि इसकी शुरुआत लेबनान युद्ध के बाद प्रभावित बच्चों और उनके अधिकारों की ओर पूरे विश्व का ध्यान आकार्षित करने के लिए की गई थी। आइए महामारी के इस काल में बच्चों की बेहतरी के लिए कुछ करने की कोशिश करें।


 
Children are becoming aggressive due to increased screening time
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
बात-बात पर क्रोधित हो रहे बच्चे
ओपीडी और प्राइवेट क्लीनिक बंद हैं। कोरोना की दहशत और लॉकडाउन ने मानसिक व शारीरिक रूप से समाज को बहुत चोट पहुंचाई है। इस बीच आगाज हुआ वेबिनार और सोशल मीडिया पर लाइव सेशन का। हमने चार काउंसलर से बात की। उन्होंने अपनी 12 वेबिनार और सोशल मीडिया लाइव सेशन में शामिल हुए 1300 से अधिक प्रतिभागियों के सवालों के आधार पर बताया कि 98 फीसदी अभिभावकों ने यही समस्या बताई कि वे ऑनलाइन पढ़ाई के विरोध नहीं, लेकिन जिस तरह से बच्चों के व्यवहार में चिड़चिड़ापन आ रहा है, वे बात-बात में क्रोधित हो रहे हैं, वह चिंता में डाल देता है।
 
Children are becoming aggressive due to increased screening time
प्रतीकात्मक तस्वीर
दो महीनों में बढ़ गई बाल हिंसा
बाल कल्याण समिति की सदस्य व चाइल्ड लाइन लखनऊ की निदेशक डॉ. संगीता शर्मा ने बताया कि अप्रैल 2019 से मार्च 2020 तक बच्चों से हिंसा के 619 मामले दर्ज हुए हैं। इसमें स्कूल में मार पड़ना, घरेलू हिंसा के बाद बच्चों पर गुस्सा उतारना, पड़ोसी से झगड़े की खीझ बच्चे पर उतारना, शराब पीकर बच्चों को मारने की शिकायतें आईं। जबकि कोविड के दौरान यानी अप्रैल से मई 2020 में बच्चों पर हुई हिंसा के 46 मामले रिपोर्ट हुए हैं। इसमें ज्यादातर मामले शराब पीकर बच्चे को मारने, अभिभावकों द्वारा अपना गुस्सा बच्चों पर निकालने के हैं। इनमें 50 फीसदी शिकायतें उन परिवारों की हैं, जो प्रतिष्ठित और पढ़े लिखे हैं।


 
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Children are becoming aggressive due to increased screening time
डॉ रश्मि सोनी - फोटो : अमर उजाला
खुद को बदलें अभिभावक
काउंसलर व कोविड मेंटल हेल्थ सोल्जर डॉ. रश्मि सोनी कहती हैं कि कुछ शिकायतें तो ऐसी आईं कि बच्चें कहने लगे कि कम से कम खाने की छुट्टी तो दीजिए। हर तरह की एक्टिविटी भी ऑनलाइन कराई जाने लगी है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के साथ धैर्य से पेश आना होगा। अपना तनाव बच्चे पर निकालने से बचना होगा। सामान्य दिनों में मैं नौ स्कूलों में प्रेप से कक्षा 12 तक के सैकड़ों बच्चों से महीने में तीन बार मिलती हूं। इनमें से 90 फीसदी बच्चे ऐसे हैं, जो स्कूल-घर के गुस्से का शिकार होते हैं और नतीजा खुद उनका व्यवहार आक्रामक हो रहा है। टीचर और मैनेजमेंट को भी समझना होगा।
 
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Children are becoming aggressive due to increased screening time
डॉ अनुभूति - फोटो : अमर उजाला
बढ़ सकती हैं विकृतियां
केजीएमयू की क्लीनिकल साइकोलाजिस्ट डॉ. अनुभूति जैन कहती हैं कि एकतरफ लॉकडाउन में हर तरह की गतिविधियों का बंद हो जाना, दूसरी तरफ ऑनलाइन पढ़ाई का दबाव और फिर माता-पिता की खीझ, बच्चों में अनिश्चितिता को बढ़ाएगी। अंदर ही अंदर बच्चा घुटने लगेगा। अभी न तो ओपीडी चल रही है न ही लोग बाहर निकल रहे हैं। लेकिन इस अंदेशे से इनकार नहीं की जा सकता कि आक्रामकता और मानसिक दबाव बच्चों में कई तरह की विकृतियों को जन्म दे सकता है। इससे पहले ही हमें सचेत हो जाना चाहिए।
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