जीएसटी लागू हुए रविवार को एक वर्ष पूरा हो गया। पिछले वर्ष एक जुलाई 2017 को इसे लागू किया गया था। इस दौरान व्यापारियों ने कारोबार की राह में कई झंझावातों का सामना करते हुए कई बार संभलने की कोशिश की। व्यापारियों की मानें तो पहले टैक्स को कैलकुलेट करना आसान था। जीएसटी लागू होने पर कई महीने तो टैक्स का गणित समझने में लग गए। ई-वे बिल के झंझट ने और परेशानी पैदा कर दी। जीएसटी से ब्रांडेड कंपनियों के दिन तो बहुर गए पर, छोटे उत्पादकों व निर्माताओं की कमर टूट गई। साइकिल जैसे उद्योग तो बंदी के कगार पर पहुंच गए हैं। ऐसे में व्यापारियों के पास धंधा बदलने के अतिरिक्त दूसरा चारा नहीं बचा है। कुछ तरह के अनुभव व्यापारियों ने जीएसटी की वर्षगांठ से एक दिन पूर्व शनिवार को साझा किए।
#जीएसटीएकवर्ष: छोटे कारोबारियों की तोड़ी कमर, अब भी कर रहे हैं संभलने की कोशिश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ई-वे बिल से बनी समस्या
कपड़ा व्यवसायी उत्तर कपूर कहते हैं कि जीएसटी लागू होने के बाद कपड़ा उद्योग में बड़ी कंपनियों ने तो खुद को सेटल कर लिया पर, गांव-शहर के व्यापारियों के लिए दिक्कतें बनी रहीं। इससे उबरने का मौका भी नहीं मिला कि ई-वे बिल आ गया। फिर समस्याएं पैदा हो गईं। पर, उम्मीद है कि जल्द ही पूरा सिस्टम ढर्रे पर लौट आएगा। जीएसटी कैलकुलेशन की समस्याएं धीरे-धीरे ठीक हो रही हैं। पिछले एक साल में 15 प्रतिशत व्यापार प्रभावित हुआ है।
ऐसे तो छोटे मैनुफैक्चरर खत्म हो जाएंगे
स्टेशनरी कारोबारी जितेंद्र सिंह कहते हैं कि जीएसटी पर अब भी भ्रम है। शिक्षा पर सरकार का जोर है पर, स्टेशनरी पर अलग-अलग श्रेणियों में जीएसटी है। इससे कारोबार प्रभावित हो रहा है। सर्वाधिक समस्याएं ग्रामीण इलाकों में हैं। बड़ी बड़ी कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं पर, छोटे मैनुफैक्चरर की कमर टूट रही है। बिना तैयारियों के जीएसटी लागू की गई। 25 से 30 प्रतिशत व्यापार प्रभावित हुआ है।
रिफंड के करोड़ों रुपये फंसे
साइकिल कारोबारी नवीन अरोड़ा कहते हैं कि साइकिल का पूरा कारोबार उधार पर चलता है। कंपनियां व्यापारियों को सामान देकर धीरे-धीरे रुपये वसूली होती हैं। ऐसे में जीएसटी आने से व्यापार प्रभावित होने लगा। करोड़ों रुपये का रिफंड जीएसटी में फंसा है। साइकिल के पार्ट की सेल 25 प्रतिशत रह गई है, जो धीरे-धीरे बंद होने की कगार पर है। वहीं, साइकिल की बिक्री 50 प्रतिशत घटी है। समझ में नहीं आ रहा है कि सरकार चाहती क्या है। अब धंधा बदलना पड़ेगा।
जुगाड़ियों ने खोज लिए रास्ते
एफएमसीजी कारोबारी विनोद अग्रवाल का कहना है कि एफएमसीजी पर जीएसटी का बहुत असर नहीं पड़ा है। इसे एडजस्ट कर लिया गया है। खास बात तो यह है कि जो ईमानदारी से व्यापार करते हैं, उनकी हालत जीएसटी के चलते खराब है, बेईमानी व जुगाड़ से कारोबार करने वाले व्यापारियों ने रास्ते खोज लिए हैं और उनका व्यापार भी फल फूल रहा है। उम्मीद है कि सरकार व्यापारियों के हितों की अब और अनदेखी नहीं करेगी।