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आईएस संदिग्ध आतंकी की पत्नी का बड़ा खुलासा, अल्लाह का वास्ता देकर करा देता था चुप, विरोध पर करता था अभद्रता
Mon, 24 Aug 2020 11:21 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, बलरामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बलरामपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 24 Aug 2020 11:21 AM IST
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दिल्ली आईएसआईएस आतंकवादी अबू यूसुफ:
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली में पकड़ा गया आईएस का संदिग्ध आतंकी मुस्तकीम खान उर्फ अबू यूसुफ पिछले दो साल से घर पर विस्फोटक इकट्ठा कर रहा था। यह खुलासा उनकी पत्नी आयशा ने किया है। आयशा ने रविवार को बताया, उसने कई बार पति के खतरनाक मंसूबों का विरोध किया, लेकिन उसने अल्लाह का वास्ता देकर उसे चुप करा दिया।
पत्नी आयशा
- फोटो : अमर उजाला
इतना ही नहीं, ज्यादा विरोध करने पर वह अभद्रता करता था। डर के कारण उसने चुप्पी साध ली। जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद यूसुफ ने पुलिस को घर में रखा बम वाला जैकेट, विस्फोटक व अन्य सामान रखने होने सूचना दी।
isis terrorist Abu Yusuf
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली पुलिस व यूपी एटीएस की टीम जब उसके घर पहुंची तो उसने पत्नी से फोन पर उनकी बात कराई। उसने पत्नी से कहा कि संदूक में जो आपत्तिजनक सामान रखा है, वो पुलिस को सौंप दे। आयशा ने पुलिस को बताया कि जैकेट तालाब में फेंक दी है, जबकि बाकी सामान संदूक में है।
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आतंकी यूसुफ के घर से बरामद विस्फोटक व अन्य सामान
- फोटो : एएनआई
पुलिस ने तालाब से जैकेट व संदूक से बैटरी, विस्फोटक, डेटोनेटर और आईएस का झंडा बरामद किया। इस बीच, यूसुफ के माता-पिता ने कहा कि उनके बेटे ने अक्षम्य गलती की है। लालच तथा बहकावे में आकर उसने यह कदम उठाया। अगर वह दोषी है तो उसे सजा मिले। लेकिन हम सरकार से अपील करते हैं कि उसे सुधरने का एक मौका दे। भटके इंसान को तो ऊपर वाला भी माफ कर देता है।
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गिरफ्तार आतंकी अबु युसूफ
- फोटो : अमर उजाला
बेटे के नाम पर बनाई थी आईडी
नौवीं पास मुस्तकीम ने टेलीग्राम एप के जरिये वह आईएस के हैंडलर्स के संपर्क में रहता था। मुस्तकीम ने अपने बेटे मोहम्मद यूसुफ के नाम पर एप पर आईडी बनाई थी, जिसके बाद उसका नाम भी यूसुफ पड़ गया। पत्नी के मुताबिक, वह सूचनाओं का आदान प्रदान मोबाइल मैसेज से ही करता था। मोबाइल पर ही अधिक समय तक व्यस्त रहना तथा मोबाइल पर ही धार्मिक तकरीर आदि सुनना उसका शौक था। गांव वालों से उसका मेलजोल नाम मात्र का ही था। अच्छे कपड़े पहनना तथा महंगे जूते व चश्मे का भी शौकीन था।
नौवीं पास मुस्तकीम ने टेलीग्राम एप के जरिये वह आईएस के हैंडलर्स के संपर्क में रहता था। मुस्तकीम ने अपने बेटे मोहम्मद यूसुफ के नाम पर एप पर आईडी बनाई थी, जिसके बाद उसका नाम भी यूसुफ पड़ गया। पत्नी के मुताबिक, वह सूचनाओं का आदान प्रदान मोबाइल मैसेज से ही करता था। मोबाइल पर ही अधिक समय तक व्यस्त रहना तथा मोबाइल पर ही धार्मिक तकरीर आदि सुनना उसका शौक था। गांव वालों से उसका मेलजोल नाम मात्र का ही था। अच्छे कपड़े पहनना तथा महंगे जूते व चश्मे का भी शौकीन था।