दूसरे दिन भी पकड़ में नही आया तेंदुआ, अब भूख-प्यास से परेशान कर पकड़ने की रणनीति पर अमल
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आशियाना की औरंगाबाद खालसा कॉलोनी में दुबका तेंदुआ शुक्रवार देर रात तक हाथ नहीं आया। वन विभाग की रेस्क्यू टीम पिछले चालीस घंटे से वहां डेरा डाले हैं। वक्त बीतने के साथ दहशत बढ़ती जा रही है। पिछले चालीस घंटे में उसे पकड़ने में नाकाम वन विभाग ने शुक्रवार को मेट्रो की दूसरी यूनिट के अलावा सेना से भी जाल उधार लिए।
तड़के एक बार तेंदुए में हरकत दिखी थी, फिर इसके बाद वह शांत रहा। वहीं वन विभाग की टीम ने भी एहतियात बरती और उसे उकसाना सही नहीं समझा। इस बीच मुंबई के विशेषज्ञों से भी उसे पकड़ने के लिए सलाह ली गई और भूखे-प्यासे तेंदुए को पकड़ने की रणनीति पर काम शुरू किया। गौरतलब है कि आशियाना में घुसे तेंदुए ने बृहस्पतिवार को चार लोगों पर हमला किया और इसके बाद वह मैदान में पड़ी सीवरेज पाइपों के बीच दुबक गया।
भूखा-प्यासा रख कर पकड़ने की तैयारी
उपनिदेशक जू डॉ. उत्कर्ष ने बताया कि तेंदुआ लंबे समय तक भूख तो सहन कर सकता है, लेकिन प्यास तो लगेगी ही। ऐसे में उसने बृहस्पतिवार सुबह से पानी नहीं पिया है। ऐसे में तीनों पिंजड़ों में पानी है, वो आयेगा तो फंसने की उम्मीद है। मुख्य वन संरक्षक अवध प्रभाग के प्रवीण राव ने बताया कि तेंदुआ बृहस्पतिवार सुबह से भूखा और प्यासा है, ऐसे में हम उसकी इसी भूख प्यास को उसे दबोचने में काम लेने जा रहे हैं।
पुलिस ने लाठियां फटकार तमाशबीनों को खदेड़ा
लगातार दूसरे दिन रेस्क्यू ऑपरेशन की सबसे बड़ी बाधा बने इलाकाई लोग शुक्रवार सुबह फिर से जुटना शुरू हो गए तो ऑपरेशन टीम को दिक्कत होने लगी। बेकाबू लोग बार-बार जाल के करीब जाकर कभी सेल्फी लेते तो कभी चिकित्सकों के वाहनों के पास चटिया लगाते। पुलिस-पीएसी जवानों की तैनाती और भीड़ लगाने से मना करने के बाद भी जब लोग नहीं सुधरे तो डयूटी पर तैनात महिला क्षेत्राधिकारी समेत फोर्स ने सबको फटकार लगाते हुए मैदान से बाहर किया। फोर्स ने लाठियां फटकार खदेड़ा इसके बाद पूरे मैदान के चारों ओर रस्सों से बैरीकेडिंग की गई।
लापरवाही : जाल तो उधार लिया ही, तकनीकी दिक्कत के चलते ड्रोन का भी फूला दम
शुक्रवार को तेंदुए की घेराबंदी बढ़ा दी गई। तीन पिंजड़े लगाए गए हैं और इलाके को तीन लेयर वाले जाल से घेर दिया गया है। रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ तो टीम को करीब 500-600 मीटर जाल की जरूरत पड़ी। लगभग 300 मीटर जाल पहले ही लगाया जा चुका था।
कुछ जाल एलडीए की यूनिटों से मंगाया गया। मेट्रो की दूसरी यूनिट से भी जाल मंगवाया गया। फिर भी कुछ मात्रा में जाल कम पड़ रहा था तो सेना से मदद मांगी गई। सेना के जवान और अफसर तुरंत जाल लेकर पहुंच गए। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, ये जाल सुतली रस्सी से बुना था और 100 मीटर से कम लंबाई का था।
यही नहीं ड्रोन लेकर पहुंची पुलिस मैदान में ड्रोन उड़ा कर लोकेशन की भी तैयारी की, लेकिन तकनीकी कारणों के चलते वो पूरी तरह से लंबी उड़ान नहीं उड़ पाया। देर शाम तीनों पिंजड़ों के आसपास के इलाके को हरी और सफेद पन्नी से ढका गया, ताकि दृश्यता कम हो सके। इसकी सलाह मुंबई के संजय गांधी नेशनल पार्क के विशेषज्ञ डॉ. पीट ने दी थी।
जू प्रशासन ने इलाके में स्टाफ भी बढ़ा दिया है। टीम को लीड कर रहे डॉ. उत्कर्ष का साथ देने के लिे जू केदूसरे विशेषज्ञ डॉ. अशोक और दो जूनियर चिकित्सकों के अलावा कई और सपोर्ट स्टाफ भी बढ़ाए गए हैं। एक पिंजड़ा देर रात दो बजे के आसपास लगावाया गया, जबकि तीसरा पिंजड़ा सुबह लगवाया गया। तीनों ही पिंजड़ों में मुर्गी-पानी और गोश्त रखवाया गया।