अब वक्त आगे बढ़कर देखने का है। भारत का लोहा तो दुनिया पहले से ही मानती है, अब आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार करने का वक्त है। कोरोना काल में नए इरादों, नई क्षमताओं के साथ खुद की पहचान बनाने वाले आत्मनिर्भर युवा दुनिया के लिए ब्रांड बन चुके हैं, बस इस संकल्प को सींचना होगा और जड़ों से जुड़े रहकर हर भारतीय को आगे बढ़ना होगा। यह निष्कर्ष रहा शनिवार को प्रवासी भारतीय दिवस पर अमर उजाला द्वारा आयोजित वेबिनार में विशेषज्ञों से संवाद का। देश-दुनिया में अपनी चमक बिखेर रहे लखनवी और सामाजिक मोर्चे पर योगदान दे रही शख्सियतें इस वेबिनार का हिस्सा रहीं। जानिए क्या कहा उन्होंने।
प्रवासी भारतीय दिवस पर वेबिनार, विशेषज्ञ बोले- आत्मनिर्भरता के लिए ब्रांड इंडिया का निर्माण जरूरी
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अपनी जड़ों में ही देखना होगा
लखनऊ विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख प्रो. मनोज कुमार अग्रवाल का कहना है कि प्रवासी भारतीय भारतीयता की जड़ों को सींचने का काम करते हैं। दुनिया में शायद ही ऐसा कोई देश हो जहां भारतीय न हों। कोरोना काल ने भारत को नए रूप में ढालने का मौका दिया है। कोरोना ने सिखाया है कि हमें अपनी जड़ों की ओर ही देखना होगा। भारतीयता को सींचना होगा। यह काम प्रवासी भारतीयों से बेहतर कोई दूसरा नहीं कर सकता है।
ब्रांड इंडिया का निर्माण जरूरी
यूएनपीएफ की निदेशक डॉ. फराह उस्मानी का कहना है कि त्रिस्तरीय संरचना पर कार्य करने की आवश्यकता है। हमें राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और ब्रांड इंडिया को प्रमोट करने पर ध्यान देना होगा। हमें अपने देश के अच्छे तौर तरीकों, तकनीक को शेयर करना होगा। अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए विश्व को भारतीयता के गौरव से पुन: रूबरू कराना होगा। भारत की वैश्विक छवि में सुधार हुआ है। अब ब्रांड इंडिया को प्रमोट करना होगा।
दृष्टिकोण पर काम करना आवश्यक
शिकागो में रहने वाले डिजिटल ट्रांसफार्मेशन लीडर राहुल दत्त अवस्थी का कहना है कि दृष्टिकोण पर काम करना बेहद जरूरी है। अगर हमें 2024 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है तो शोध के दृष्टिकोण को बदलना होगा। हमें डिजिटल रूप में अपनी भाषा को बढ़ावा देना ही होगा। जिस दिन हमारी भाषा में कोडिंग होने लगेगी, एक बड़ा डिजिटल ट्रांसफार्मेशन होगा। भारत भी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के क्षेत्र में अग्रणी देश बन जाएगा और सभी के लिए इस डिजिटल ट्रांसफार्मेशन का हिस्सा बनना आसान हो जाएगा। प्रवासी भारतीय होन के नाते डिजिटल ट्रांसफार्मेशन के लिए इंडियन भाषा में कोडिंग को बढ़ावा देने से भारत के प्रति विश्व के दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव लाएगा।
क्षमता और हुनर निखारने पर हो काम
सेवा की इंटरनेशनल प्रोजेक्ट डायरेक्टर, जयंती रामानन का कहना है कि आज युवाओं खासकर लड़कियों की क्षमता निर्माण व हुनर निखारने पर काम करना बेहद जरूरी है। कोरोना काल ने हमें इसकी जरूरत बताई है। कोरोना संकट काल में जब लड़कियों ने सरकारी स्कूलों में जाना बंद कर दिया तो उन्हें सैनिटरी पैड की उपलब्धता नहीं हो पा रही थी, जिस पर काम करते हुए गांवों में पुन: सैनिटरी पैड बनाने के छोटे-छोटे केंद्रों की स्थापना करवाई। इसी तरह महिलाओं, बालिकाओं की क्षमता निर्माण के प्रयास विदेशों में भारत की आत्मनिर्भरता को एक ब्रांड बनाएंगे।