उन्होंने ‘आंचल में दूध और आंखों में पानी की कहानी’ को काफी पीछे छोड़ दिया था। उनके आंचल उनकी प्रगति में बाधा नहीं थे, वे परचम बन गए थे। समाज की ऐसी ही सशक्त नारियों को ‘अमर उजाला’ ने सोमवार की शाम एक भव्य समारोह में सलाम किया। चिकित्सा, शिक्षा, लोकसेवा, व्यापार, समाजसेवा, विज्ञान, कला-संस्कृति सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान करने वाली महिलाओं को ‘अमर उजाला’ प्रथमा समारोह में अचीवर अवार्ड से सम्मानित किया गया।
स्टाइल डीवा में प्रकृति चंद्रा ने मारी बाजी, प्रथमा समारोह में बेहतरीन काम के लिए महिलाओं का सम्मान
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ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने समारोह में अपर्णा मिश्र (स्टार्टअप), वर्षा श्रीवास्तव (फैशन), मोहसिना मिर्जा (विज्ञान), अन्तरा भट्टाचार्य (संगीत-वादन), गरिमा कपूर (खेल), रीना सिंह (सामाजिक कार्य), विपुल बी वार्ष्णेय (कला-संस्कृति), मंदाकिनी प्रधान (चिकित्सा), तूलिका साहू (शिक्षा) और चाहत मल्होत्रा (संगीत-गायन) को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया। इस मौके पर शर्मा ने कहा कि समाज में बदलाव के लिए बेटियों को प्रयास करना होगा। समाज में जो विकृतियां हैं, उनसे लड़ने का हौसला भी उनमें है।
उन्होंने कहा कि हम वर्ष में दो बार नारी की पूजा करते हैं। वह शैलपुत्री है, ब्रह्मचारिणी है, चंद्रघंटा है, कात्यायनी भी है। उसे अपने काली स्वरूप का प्रकटीकरण भी करना होगा। शर्मा ने हालांकि यह भी कहा कि कई बार स्त्रियां ही स्त्रियों के राह में रुकावट भी बन जाती हैं। उन्होंने बताया कि मेरी दो बड़ी बहनों ने घर से चार किलोमीटर दूर जाकर उच्च शिक्षा हासिल की और आज वे सरकारी सेवाओं में हैं। पीएचडी चैंबर, पायनियर मोंटेसरी इंटर कालेज और रेशमगढ़ के सहयोग से आयोजित समारोह में प्रायोजकों का प्रतिनिधित्व कर रहे मुकेश बहादुर सिंह, विभोर मिश्र और बृजेंद्र सिंह को भी स्मृति चिह्न प्रदान किया गया।
फरहा, स्वरित और चाहत ने भरे सुरों के रंग
समारोह में फरहा नाज, स्वरित निगम और चाहत मल्होत्रा ने सुरों के रंग भरे। फरहा ने ‘प्रेम रतन धन पायो’, ‘ढोल बाजे सुनाया’ और समारोह में सम्मानित हुई चाहत के साथ पुराने गीत ‘आओ हुजूर’, ‘ओ मेरे सोना’, ‘दम मारो दम’, ‘कजरा मोहब्बत वाला’, ‘झुमका गिरा रे’ जैसे गीतों से लोगों को झुमा दिया। स्वरित ने ‘इतनी सी हंसी’, ‘अलविदा’ सहित कई गीत सुनाए।