...भगवान ने ये क्या किया। अब मुझे कौन संभालेगा। वह तो अपनी मां के अंतिम दर्शन को जा रही थी लेकिन ऐसी अनहोनी हुई कि अब घर से एक साथ चार अर्थियां उठेंगी। यह बोझ अब सहा नहीं जाएगा। हादसे के बाद बदहवास हुए संजय बार-बार यही दोहरा कर बेहोश हुआ जा रहा था। रामकोट के हेमपुर नेरी के पास हुई दुर्घटना में उसकी पत्नी ऊषा, बच्चे शिवम व सरहज की मौत हो गई। वहीं घटना से कुछ देर पहले ही सास की मौत का गम भी उसे साल रहा था। ट्रक व टैम्पो की टक्कर में संजय के परिवार के साथ कई अन्य परिवारों की खुशियां भी तबाह हो गईं।
सीतापुर हादसा: एक साथ उठेंगी, मां-बेटी, बहू व नाती की अर्थी, हाइवे से पोस्टमार्टम हाउस तक कोहराम
हाईवे से पोस्टमार्टम तक कोहराम
हादसा नेरी के निकट हुआ, जिसके बाद शवों को पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया गया। इस हादसे की खबर पाने के बाद मृतकों के परिवारीजन दौड़कर घटनास्थल पर पहुंच रहे थे। जिसके बाद वे पोस्टमार्टम हाउस जा रहे थे। हालत यह थी कि घटनास्थल से पोस्टमार्टम हाउस तक हायतौबा मची हुई थी। हर कोई अपने परिवार के सदस्य को खो देने के गम में रो रहा था।
आधा घंटे तक होता रहा क्रेन का इंतजार
नेरी के निकट ट्रक ने टैम्पो को रौंद दिया था। निकट गांव के लोग मदद के लिए दौड़कर मौके पर पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचकर लोग बेबस हो गए। वजह थी कि पूरा टैम्पो व उसमें सवार लोग ट्रक के नीचे दबे हुए थे। ऐसे में बगैर ट्रक को हटाए मदद नहीं पहुंचाई जा सकती थी। क्रेन के बिना ट्रक को हटाना संभव नहीं था। करीब आधा घंटे के इंतजार के बाद क्रेन पहुंची, तब कहीं जाकर बचाव कार्य शुरू हो सका।
दूर खड़े रहे ग्रामीण
हादसे में छह लोगों की जान जा चुकी थी और एक व्यक्ति घायल हुआ था। हादसे को देखने के लिए क्षेत्र के सैकड़ों लोग मौके पर जुटे थे। बावजूद इसके कोई घायल व मृतकों को हाथ लगाना नहीं चाह रहा था। मौके पर पहुंची पुलिस ने ही घायल को जिला अस्पताल पहुंचाया। वहीं शवों को वाहन से निकाल कर बाहर रखा।
अलर्ट मोड पर किया अस्पताल
खबर मिलते ही डीएम डॉ. सारिका मोहन ने जिला अस्पताल को अलर्ट किया। डीएम के निर्देश के बाद तत्काल ही इमरजेंसी वार्ड को दुरुस्त किया गया। बेडों को खाली किया गया। अस्पताल के स्ट्रेचर लाकर इमरजेंसी के सामने लगाए गए। वहीं इमरजेंसी में सीएमएस डॉ. अनिल अग्रवाल चार डॉक्टरों की टीम के साथ तैनात हो गए।
अब कैसे होगा बिटिया का ब्याह
टैम्पो चालक हीरालाल उर्फ लालू के परिवार में पत्नी रामदेवी, पुत्री कोमल (18), आकाश (12), शिवा (8) व काजल (8) हैं। हादसे के बाद पत्नी रामदेवी का रो-रोकर बुरा हाल था। पत्नी बार-बार कह रही थी कि उसकी पुत्री कोमल विवाह के योग्य है। पति लालू टैम्पो चलाकर घर का खर्च पूरा करता था। इधर बेटी के विवाह की तैयारी भी कर रहा था। अब पति परिवार को छोड़कर चला गया। इससे रामदेवी पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। उसे पति को खोने का गम तो था कि साथ ही बच्चों की परवरिश की चिंता भी सता रही थी।