सुखलाल के सामने पत्नी का शव ठेले पर रखा था। बेटे इससे लिपटकर रो रहे थे। पॉलिथीन में मां की लाश देखते ही बेटी बेहोश हो गई। कच्ची मड़ैया में मौजूद महिलाएं भी आंसू नहीं रोक पा रही थीं। ऐसा ही हृदय विदारक विलाप सुखलाल के घर के ठीक सामने भी हो रहा था। सीतापुर के अटरिया के टिकौली गांव में मंगलवार को यही नजारा देखने को मिल रहा था।
Tikauli Live: भयावह हादसे से आंसुओं के सैलाब में डूबा टिकौली, हर तरफ पसरा मातम, दुर्घटना में हुई थी 10 की मौत
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मां को जाने से रोका था...
-मृतक अन्नपूर्णा देवी
सुखलाल के घर से बाईं ओर पतली गली से होकर जाने पर अगला मकान बाबूराम अवस्थी का है। उनका व सुखलाल का घर सटा है। बाबूराम की पत्नी अन्नपूर्णा देवी हादसे का शिकार हो गईं। मां व बहन फूट-फूटकर रो रही थीं। दो बेटे आशीष व मनीष हैं। पहला बीएससी कर रहा है, दूसरा इंटर में है। ग्रामीणों ने बताया कि बेटों ने मां को जाने से रोका था, लेकिन वह नहीं मानी और फिर हमेशा के लिए चली गई।
पड़ोसी के घर नहीं जला चूल्हा
-मृतक मालती देवी
बाबूराम के घर से पतली गली में बढ़ने पर दाहिनी तरफ राजकिशोर का मकान है। उनकी पत्नी मालती देवी का शव बर्फ की सिल्ली पर रखा था। बेटे शैलेंद्र, राजेंद्र तथा बेटी विनीता मां से लिपटकर रो रहे थे। राजकिशोर के घर गमी होने के कारण पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम परिवार के घर भी चूल्हा नहीं जला।
पत्नी के साथ बेटी को भी खो दिया
-मृतका कोमल व आयुषि
राजकिशोर के घर से 50 मीटर आगे गांव के सबसे रईस जोतकार चुन्नीलाल मौर्य का मकान है। हादसे में उनकी पत्नी कोमल व बेटी आयुषि की जान चली गई। प्रधान अखिलेश कुमार ने बताया कि चुन्नीलाल छह भाई और दो बहनें हैं। पिता बद्री प्रसाद गांव के सबसे बड़े जोतकार थे। रसूखदार होने के बावजूद उनके घरवालों की गांववालों से आत्मीयता थी। चुन्नीलाल के परिवार में बेटा अर्पित व आशुतोष बचे हैं।
रात में ही कर दिया बेटी को दफन
- मृतका अंशिका
चुन्नीलाल के मकान से बाईं ओर मुड़ने पर रास्ता गांव के अंदर जाता है। दो सौ मीटर खड़ंजा पार करने पर पवन गुप्ता का घर है। उनकी बेटी अंशिका की हादसे में जान चली गई, जिसे उन्होंने बीती रात ही दफन कर दिया था। चौखट पर बैठीं महिलाओं की डबडबाई आंखें दर्द बयां कर रही थी। पवन गुप्ता भी कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थे।