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शर्मनाक: अस्पताल में प्रसूता को बनाया बंधक, जेवर बेचकर दिए छह हजार रुपये, तब दिया बेटे का शव

Tue, 26 Sep 2017 11:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 26 Sep 2017 11:36 AM IST
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A patient's family asked for money to give their child's deadbody.

मोहनलालगंज के संजीवनी अस्पताल में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। आरोप है कि पहले तो डॉक्टरों की लापरवाही से नवजात की जान चली गई। इसके बाद जब पिता ने शव मांगा तो अस्पताल ने पहले रुपये जमा कराने की बात कही। गरीब ने कुछ मोहलत मांगते हुए अंतिम संस्‍कार को पहले शव दे देने की मिन्नत की, लेकिन अस्पतालवालों का दिल नहीं पसीजा।



मजबूतर पिता ने पत्नी के जेवर बेचकर छह हजार रुपये जमा कराए तब जाकर उसे बच्चे का शव मिल सका। इतना ही नहीं उसे पत्नी से मिलने भी नहीं दिया गया। महिला को घंटों बंधक बनाए रखा गया। इसके बाद पीड़ित ने कर्ज लेकर पैसे जमा किए, तब जाकर दूसरे दिन सोमवार सुबह उसकी पत्नी को डिस्चार्ज किया गया। पीड़ित ने इसकी लिखित शिकायत एसडीएम से की।

मोहनलालगंज के उत्तर गांव निवासी टैक्सी चालक अंकित की पत्नी मानसी (21) को शनिवार रात प्रसव पीड़ा के बाद सीएचसी ले जाया गया, लेकिन इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात डॉक्टर ने मामले को जटिल बताकर निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दे दी। इसके बाद आशा बहू गर्भवती को लेकर रात करीब एक बजे संजीवनी अस्पताल पहुंची। वहां उसे भर्ती कर लिया गया।

A patient's family asked for money to give their child's deadbody.

आरोप है कि परिवारीजनों को बिना बताए ही रविवार शाम चार बजे महिला का सिजेरियन प्रसव करा दिया गया, जिसके कुछ समय बाद ही नवजात की मौत हो गई, लेकिन स्टाफ बच्चे के स्वस्थ होने की बात कहकर ढाई घंटे तक मामले को छिपाए रहा। जब बेटे की मौत की खबर अंकित को लगी तो उसने लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।

उसने जब बच्चे का शव मांगा तो अस्पताल प्रशासन साढ़े आठ हजार रुपये मांगने लगा। अंकित ने रुपयों के इंतजाम को थोड़ा वक्त देने की बात कहकर शव मांगा तो अस्पताल ने इन्कार कर दिया। इसके बाद टैक्सी चालक ने पत्नी के गहने बेचकर किसी तरह छह हजार रुपये जमा किए। इसके बाद उसे नवजात का शव सौंपा गया।

ढाई हजार रुपये दो, तब करेंगे डिस्चार्ज
बेटे के शव का अंतिम संस्कार करने के बाद जब अंकित मानसी को लेने अस्पताल पहुंचा तो उससे मिलने तक नहीं दिया गया। कहा गया जब तक बाकी के 2500 रुपये जमा नहीं करोगे तब तक न तो पत्नी से मिलने दिया जाएगा न ही उसे डिस्चार्ज किया जाएगा। मानसी को कई घंटों तक बंधक बनाए रखा गया। सोमवार सुबह अंकित ने कर्ज लेकर 2500 रुपये चुकाए तब उसे डिस्चार्ज किया गया।

A patient's family asked for money to give their child's deadbody.
सीएचसी की डॉक्टर पर निजी अस्पताल भेजने का आरोप
अंकित का आरोप है कि जब वह पत्नी को लेकर मोहनलालगंज सीएचसी पहुंचा तो वहां मौजूद स्त्री रोग विशेषज्ञ ने देखते ही तुरंत मामला गंभीर बात कर संजीवनी अस्पताल ले जाने की सलाह दे दी। आरोप लगाया कि डॉक्टर के ही इशारे पर आशा उसे लेकर संजीवनी अस्पताल ले गई थी।

सीएचसी के पास रहते हैं संजीवनी अस्पताल के दलाल
सूत्रों की मानें तो मोहनलालगंज सीएचसी के पास हर समय संजीवनी अस्पताल के दलाल घूमते रहते हैं। मौका मिलते ही वे तीमारदारों को कम पैसों में इलाज दिलवाने का दावा कर इस अस्पताल में भर्ती करवा देते हैं। सीएचसी के पास संजीवनी अस्पताल की गाड़ी भी खड़ी रहती है। एक बार अस्पताल पहुंचाने के बाद तीमारदारों को धमकाकर वसूली की जाती है।

मोहनलालगंज सीएचसी में रात में नहीं मिलता इलाज
आरोप है कि मोहनलालगंज सीएचसी में अकसर रात की ड्यूटी से डॉक्टर नदारद रहते हैं। यहां प्रसव करवाने को नर्स ही रहती हैं। ऐसे में अगर रात में कोई गर्भवती आती है तो उसे गंभीर बता कर दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दे दी जाती है। डॉक्टर मौजूद भी होती हैं तो सिजेरियन के लिए पर्याप्त संसाधन न होने की बात कहकर मरीज को लौटा दिया जाता है।
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एसडीएम से लगाई इंसाफ की गुहार
प्रसूता के पति ने सोमवार को एसडीएम को पत्र लिखकर इलाज में लापरवाही से नवजात की मौत, पत्नी को बंधक बनाए जाने व अस्पताल प्रशासन की करतूत पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित ने सीएमओ से भी शिकायत करने की बात कही है।

शिकायत मिलेगी तो कराएंगे जांच
मामले पर एसीएमओ डॉ. एसके रावत का कहना है कि अगर मरीज के साथ ऐसा किया गया है तो यह गंभीर मामला है। यदि इसकी शिकायत स्वास्थ्य विभाग से की जाती है तो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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