राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर के उजरियांव स्थित गंज शहीदां कब्रिस्तान के पास तीसरे दिन विरोध जारी रहा। इस दौरान इलाके के एक युवक की बारात निकलनी थी। युवक ने फैसला किया कि वह पहले प्रदर्शन में शामिल होगा, फिर उसकी बरात जाएगी।
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वहीं, ऐतिहासिक घंटाघर पार्क में सीएए व एनआरसी के विरोध के मंच पर कुरान की आयतों संग मंत्रों की गूंज भी सुनाई दी। यहां पिछले छह दिनों से प्रदर्शन कर रही मुस्लिम महिलाओं को समर्थन देने पहुंची हिंदू महिलाओं ने हवन कर एकता की मिसाल पेश की।
बुधवार को प्रदर्शनकारी 413 महिलाओं ने रोजा रखा तो दर्जन भर हिंदू महिलाओं ने भी संविधान की रक्षा के लिए उपवास किया। उधर, गोमतीनगर में महिलाओं का विरोध प्रदर्शन जारी है।
घंटाघर पर बुधवार को पंडित राजवीर हवन कर मंत्र पढ़ रहे थे तो हवन में शामिल पूजा शुक्ला, सुनीता रावत, शिप्रा अवस्थी उनका साथ दे रहीं थीं। इसी बीच जेबा यास्मीन, तबस्सुम खान, राशिदा, सदफ जाफर और हुस्नआरा कुरान की आयतें पढ़ रही थीं।
इस दौरान घंटाघर पर तिरंगे लहराते रहे और देशभक्ति के गीत गूंजते रहे। शाम को सभी महिलाओं ने एक साथ रोजा इफ्तार व व्रत खोल कर संदेश दिया कि हमारी एकता अटूट है।
सुभाषिनी अली भी पहुंचीं
घंटाघर पर महिलाओं के विरोध प्रदर्शन को समर्थन देने बुधवार को एडवा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाषिनी अली भी पहुंचीं। उन्होंने कहा कि ये आंदोलन संविधान व देश बचाने के लिए है। एपवा की प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी, सचिव कुसुम वर्मा, सह सचिव मीना ने भी महिलाओं को समर्थन दिया।
लविवि की पूर्व कुलपति एवं साझी दुनियां की अध्यक्ष डॉ. रूप रेखा वर्मा, मधु गर्ग, नाइश हसन, वंदना राय, प्रो. रमेश दीक्षित, श्रमयोगी भी समर्थन में घंटाघर पहुंचे। मैग्सेसे विजेता संदीप पांडेय दूसरे दिन भी चरखे से सूत कात कर गांधी के विचारों को महफूज रखने का संदेश दिया।
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राजधानी में मंगलवार को सीएए के समर्थन में जनसभा के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने दो टूक कह दिया कि किसी कीमत पर अधिनियम वापस नहीं होगा। इसके बावजूद घंटाघर पर प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं का उत्साह नहीं डिगा। यही वजह रही कि बुधवार को भी भारी तादात में महिलाएं प्रदर्शन स्थल पर डटी रहीं। प्रदर्शन में शामिल जूही राज सिद्दीकी ने कहा कि महिलाओं का प्रदर्शन नारी शक्ति का प्रतीक है।