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जाली दस्तावेज से फाइनेंस कराते थे वाहन, 7 गिरफ्तार, बैंक व एजेंसी की भूमिका की जांच

Mon, 25 Nov 2019 12:43 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 25 Nov 2019 12:43 PM IST
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7 people arrested for vehicle finance through fake documents in lucknow
जाली दस्तावेज से फाइनेंस कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश - फोटो : अमर उजाला

लखनऊ में क्राइम ब्रांच व कृष्णानगर पुलिस ने रविवार को एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया जो जाली दस्तावेज से बैंक से वाहन फाइनेंस कराता था। दो मास्टरमाइंड समेत गिरोह के सात गुर्गे गिरफ्त में आए हैं। पुलिस ने जालसाजों के पास से पांच लग्जरी कार, दो बुलेट व पांच बाइक बरामद की हैं। जालसाज जाली नंबर प्लेट लगाकर वाहन इस्तेमाल करते थे। पुलिस गिरोह के कुछ अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। वहीं, बैंक व एजेंसी के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

7 people arrested for vehicle finance through fake documents in lucknow
जाली दस्तावेज से फाइनेंस कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश - फोटो : अमर उजाला
एसएसपी कलानिधि नैथानी के मुताबिक, गिरोह का मास्टरमाइंड मानसरोवर योजना शहीद पथ निवासी अमित यादव और वजीरबाग मोमिन नगर निवासी रेहान खान है। गिरोह ने हजरतगंज के शाहनजफ रोड स्थित स्पीड मोटर्स से टीवीएस की अपाचे आरआर 310 बाइक फाइनेंस कराई थी।
7 people arrested for vehicle finance through fake documents in lucknow
जाली दस्तावेज से फाइनेंस कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश - फोटो : अमर उजाला

जांच में फर्जीवाड़ा मिलने पर एजेंसी के मैनेजर ने हजरतगंज थाने में केस दर्ज कराया। दोनों मास्टरमाइंड के अलावा कृष्णानगर के आजादनगर का आनंद कुमार, एलडीए कॉलोनी निवासी मो. शमीम, अलीगढ़ सिविल लाइन का कलीमुद्दीन उर्फ ओसामा और सहारा सिटी होम्स निवासी विवेक द्विवेदी है। अमित मूलरूप से अलीगढ़ का रहने वाला है। अमित व रेहान मिलकर आनंद व अनिल की फोटो लगाकर फर्जी आधार कार्ड तैयार करते थे। इसके बाद खाता खुलवाकर एजेंसियों पर जाकर वाहन पसंद करते थे। फाइनेंस के बाद कुछ दिन तक वाहन खुद इस्तेमाल कर बेच देते थे।

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जाली दस्तावेज से फाइनेंस कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश - फोटो : अमर उजाला
गाड़ी लेने के बाद जमा नहीं करते थे किस्त
एएसपी क्राइम दिनेश पुरी के मुताबिक, जालसाज कोई किस्त नहीं जमा करते थे। कार लेकर बाहर निकल जाते थे। कुछ समय बाद लौटकर वाहन का सौदा करते थे। पुलिस के मुताबिक, आठ लाख की गाड़ी पांच हजार किलोमीटर तक चलाने के बाद आधे से भी कम दाम पर बेचते थे। वहीं, किस्त बाउंस होने के बाद बैंक प्रबंधन जब छानबीन करता तो बताए गए नाम व पते पर कोई व्यक्ति मिलता ही नहीं था। जांच के बाद बैंक भी उसे डिफॉल्टर घोषित कर फाइल बंद कर देती थी। वहीं, रिकवरी के लिए लगी बैंक की टीम भी गिरोह का पकड़ नहीं पाती। जालसाज जो नंबर प्लेट लगाते थे, उसका फर्जी रजिस्ट्रेशन पेपर भी तैयार करते थे।
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जालसाजों के पास से बरामद गाड़ियां और सामान - फोटो : अमर उजाला
ये सामान हुआ बरामद
दो एक्सयूवी 300, एक इको स्पोर्ट, एक टिएगो, एक आई-20। इसके अलावा 2.65 लाख की बाइक टीवीएस अपाचे आरआर 301, दो बुलेट, दो एक्टिवा, दो बाइक व एक पल्सर बाइक। तीन फर्जी आधार कार्ड व बैंकों के सील व मुहर।
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