स्तन कैंसर का खतरा वैश्विक स्तर पर काफी तेजी से बढ़ता देखा गया है। इसे महिलाओं में कैंसर से होने वाली मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण माना जाता है। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि समय के साथ भारतीय महिलाओं में भी इस कैंसर का जोखिम काफी बढ़ गया है। वैश्विक स्तर पर इस कैंसर के कारण हर साल लाखों रोगियों की मौत हो जाती है।
Yoga Tips: अध्ययन में दावा- ब्रेस्ट कैंसर में योगासनों से मिल सकता है विशेष लाभ, जानिए कौन से अभ्यास हैं कारगर
योगासनों के दिखे अच्छे परिणाम
टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के विशेषज्ञों द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया है कि स्तन कैंसर के रोगियों के उपचार में योग को शामिल करना बेहद फायदेमंद हो सकता है। यह रोग की जटिलताओं को कम करने और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने में लाभकारी हो सकता है। डॉक्टर्स और फिजियोथेरेपिस्ट की निगरानी में स्तन कैंसर रोगियों को कराए गए योगाभ्यास-प्राणायाम के बेहतर लाभ देखे गए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्तन कैंसर में योग के लाभ को लेकर किए गए नैदानिक परीक्षण के परिणाम महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।
आइए जानते हैं कि किन योगासनों को योग विशेषज्ञ इस समस्या में लाभकारी मानते हैं?
प्राणायाम के अभ्यास से लाभ
शोधकर्ताओं ने पाया कि ब्रेस्ट कैंसर की समस्या में प्राणायाम के अभ्यास की आदत बनाने से लाभ मिल सकता है। रेडिएशन थेरेपी ले रहे स्तन कैंसर रोगियों के लिए प्राणायाम को एक सहायक चिकित्सा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के अलावा मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए प्राणायाम के अभ्यास से लाभ पाया जा सकता है। यह अभ्यास कैंसर को जोखिमों को कम करने में भी फायदेमंद है।
बालासन से फायदे
बालासन जिसे चाइल्ड पोज के रूप में भी जाना जाता है, यह मुद्रा छाती की मांसपेशियों और कूल्हों, जांघों और पीठ को आराम देती है। स्तन कैंसर के रोगियों के लिए भी इससे लाभ हो सकते हैं। यह मस्तिष्क को शांत करता है और थकान-तनाव से राहत देता है। कमर-पीठ और पेट के लिए इस योग के नियमित अभ्यास की आदत बनाना आपके लिए विशेष फायदेमंद हो सकता है।
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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।
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