लाइफस्टाइल की गड़बड़ी के कारण रीढ़ की हड्डी से संबंधित विकारों का जोखिम काफी बढ़ता जा रहा है। वयस्कों में सर्वाइकल के साथ पीठ के निचले हिस्से में दर्द की समस्या के लिए रीढ़ से संबंधित विकारों को एक कारण माना जाता रहा है। विशेषज्ञ कहते हैं, लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने की आदत ने शरीर के इस सबसे महत्वपूर्ण हड्डी के लचीलेपन और मजबूती को काफी प्रभावित कर दिया है जिसके कारण दर्द और शारीरिक लचीलेपन से संबंधित विकार बढ़ते जा रहे हैं।
Yoga Tips: World Spine Day पर जानिए रीढ़ को मजबूती देने वाले सबसे कारगर योगासन, जरूर करें इनका अभ्यास
मार्जरी आसन से रीढ़ को लाभ
रीढ़ की समस्याओं से बचाव के लिए मार्जरी आसन जिसे कैट-काऊ पोज के रूप में भी जाना जाता है, इससे लाभ मिल सकता है। यह आपके पीठ के निचले हिस्से से लेकर गर्दन तक की बेहतर स्ट्रेचिंग के साथ रीढ़ की सेहत के लिए विशेष लाभकारी हो सकती है। रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन और रीढ़ के विस्तार (आर्किंग) के लिए इसके लाभ देखे गए हैं। मार्जरी आसन योग करने से पीठ और पाचन से संबंधित समस्याओं का जोखिम भी कम होता है और यह कई प्रकार के विकारों के जोखिम को कम कर सकती है।
अधोमुख शवासन योग
अधोमुख शवासन योग के नियमित अभ्यास की आदत बनाकर आप शारीरिक तौर पर सक्रीय रहने के साथ रीढ़ से संबंधित विकारों के जोखिम को कम कर सकते हैं। हैमस्ट्रिंग और काल्फ की स्ट्रेचिंग के साथ रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ाने में अधोमुख शवासन योग को विशेष लाभकारी माना जाता है। इस योग को विशेषज्ञ शरीर को ऊपरी हिस्से में रक्त के संचार को बढ़ाने वाले अभ्यास के तौर पर जानते हैं। सभी उम्र के लोगों को दिनचर्या में इस योगासन को जरूर शामिल करना चाहिए।
उष्ट्रासन योग का करिए अभ्यास
उष्ट्रासन योग रीढ़ को सीधा और लचीला रखने में आपके लिए विशेष लाभकारी माना जाता है। मांसपेशियों को स्वस्थ रखने, रीढ़ से संबंधित दर्द की समस्या को कम करने और छाती के लिए भी इस योग के अभ्यास के लाभ देखे गए हैं। उष्ट्रासन योग का अभ्यास करने से रक्त के संचार को बेहतर बनाए रखने और मांसपेशियों में अकड़न की समस्या को दूर करने में लाभ मिल सकता है। सभी उम्र के लोगों के लिए इस योगासन को लाभकारी माना जाता है।
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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।
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