भारत के बहुत से नौजवान आजकल हृदय की बीमारियों के चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टर भी ये जानकर हैरान हैं और इन सबके लिए गलत आदतें और जीवनशैली को जिम्मेदार मान रहें हैं। आजकल इतना स्वस्थ और फिट रहने का चलन बढ़ा है लेकिन इसके बावजूद लोगों की गलत आदतें उन्हें हृदय का रोगी बना रही है। ऐसे में हृदय को स्वस्थ रखना हमारे लंबे जीवन के लिए बेहद आवश्यक है। हृदय की बीमारियों के प्रति सचेत रहने के लिए हर साल 29 सितंबर को 'विश्व हृदय दिवस' मनाया जाता है। ऐसे में हम आपको कुछ योगासन बता रहे हैं, जिनके अभ्यास से आप अपने हृदय को स्वस्थ रख सकते हैं...
World Heart Day: इन 5 योगासनों का नियमित अभ्यास कर पा सकते हैं हृदय रोग से छुटकारा
त्रिकोणासन
त्रिकोणासन को करने से हृदय स्वस्थ रहता है। इस आसन को करने से वजन भी कम होता है। मोटे लोगो के लिए यह आसन बेहद फायदेमंद है। त्रिकोणासन करने से श्वास फैलते ही छाती गहरी और लयबद्ध हो जाती है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले अपने पैरों को चौड़ा करके सीधे खड़े हो जाएं। इसके बाद अपनी रीढ़ की हड्डी को मोड़ लें और अपने हाथ को नीचे रख लें। इसके बाद अपना दाहिना हाथ ऊपर कर लें। अब अपने दाहिने हाथ की उंगली को देखें। 15 से 20 सेकंड के बाद सीधे हो जाएं। अब इसी विधि को बाएं हाथ और बाएं पैर से करें।
ताड़ासन
ताड़ासन हृदय को मजबूत करने में सहायक है। इस आसन के दौरान गहरी सांस लेने के कारण फेफड़ा फैलता है और इसकी सफाई हो जाती है। ताड़ासन करने से एक्रगता बनी रहती है। यही नहीं, इस आसन को करने से श्वास सतुंलित रहती है। आसान को करने के लिए सबसे पहले आप खड़े हो जाएं। ध्यान रहे कि इस आसान को करते समय कमर और गर्दन झुकनी नहीं चाहिए। अब अपने दोनों हाथों को ऊपर करें और धीरे-धीरे सांस लेते हुए शरीर को खीचें। इस आसान को आप 2-4 मिनट तक करें और फिर सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ जाएं।
वृक्षासन
वृक्षासन के करने से शारीरिक मुद्राओं का बेहतर संतुलन बनाता है। यह आसन कंधों को चौड़ा करता है और हृदय को बेहतर बनाता है। वृक्षासन एक स्थिर पेड़ की नकल करता है। वृक्षासन आपको एकाग्रता बढ़ाने में सहायता करता है। इसके अतिरिक्त इस आसान को करने से पैर और पीठ मजबूत होते हैं। इस आसन को करने के लिए सीधे खड़े हो जाए। इसके बाद अपने दाहिने घुटनें को मोड़ते हुए अपने दाहिने पंजे को बाएं जंघा पर रखें लें। फिर अपने हाथों को ऊपर करके जोड़ लें। अपने बाएं पैर को सीधा रखें और सतुंलन बनाए रखें।
वीरभद्रासन
वीरभद्रासन रक्त परिसंचरण में भी सुधार कर तनाव को कम करता है। इस आसन के करने से पीठ में खिंचाव पैदा होता है तथा कंधे, बाजू और पीठ की मांसपेशियां सबल होती हैं। इस आसन को करने के लिए सीधे तनकर खड़े हों। अब अपने दाएं पैर को 2 से 4 फीट तक आगे ले जाएं। दाएं घुटने को हल्का-सा मोड़ दें और इस बात का ध्यान रखें कि बायां पैर सीधा हो तथा उसका तलवा जमीन के साथ लगा हो। गहरी सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर करें। कंधों को आरामदायक स्थिति में रहने दें और दोनों कानों को अपने कंधे के पास न आने दें। फिर सांस धीरे-धीरे छोड़ते हुए पूर्वावस्था में आ जाएं। इस प्रकिया को बाएं पैर से भी दोहराएं।