आज के दौर में जब कभी हम किसी मुलाकात के लिए लेट हो जाते हैं तो इसका सारा दोष ट्रैफिक पर मढ़ना काफी आसान होता है। हालांकि ये बहाना कई बार सच भी होता है और कई बार इसे किसी परेशानी से बचने के लिए एक अच्छे विकल्प की तरह भी प्रयोग किया जाता है। देखा जाए तो दुनिया के सभी शहरों में यातायात एक बड़ी समस्या है। बेहतर सड़कों, एक्सप्रेस वे, बहु-लेन राजमार्गों ने यातायात को आसान तो बनाया है बावजूद इसके कई बार कुछ ऐसे जंक्शन होते हैं जहां व्यक्ति अटक जाता है।
अयंगर योगः शरीर के भीतरी ट्रैफिक जाम से बचाता है ऊर्ध्व बद्धअंगुलियासन
मैं योग कॉलम में ट्रैफिक के बारे में क्यों बात कर रही हूं? तो आपको बता दें कि हमारे शरीर के अंदर भी ट्रैफिक है। हमारे भीतर काफी जटिल नेटवर्क सिस्टम है, खासकर वैस्कुलर या रक्त वाहिकाओं का या फिर न्यूरल या नर्वस सिस्टम का। यह नेटवर्क सिर से पैर की उंगलियों तक जुड़ा हुआ है। इसे दो तरफा ट्रैफिक की तरह समझ सकते हैं। एक जो मस्तिष्क से शरीर के बाकी हिस्सों की तरफ जाता है जबकि दूसरा वापस शरीर के बाकी हिस्सों से मस्तिष्क की तरफ जाता है।
इस प्रकिया में एक संवेदी तंत्रिका अपने एक सेल के माध्यम से शरीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में संदेश भेजती है जबकि रक्त शरीर में धमनियों,नसों और कोशिकाओं के माध्यम से बहता है। हमारी तंत्रिका का ट्रैफिक और रक्त प्रवाह बचपन और युवा अवस्था में ठीक रहता है (यदि किसी व्यक्ति को कोई बड़ी बीमारी न हो) इसके बाद हमारे शरीर का ट्रैफिक विभिन्न जंक्शनों पर इन 'बॉटल नेक' जैसी बाधाओं का सामना करता है। नतीजतन, इन बाधाओं से कम होने वाले 'प्रवाह' की वजह से व्यक्ति रोगग्रस्त हो जाता है।
'बॉटल नेक' जैसी इन बाधाओं को दूर करने के लिए हमें सबसे पहले ये पता होना चाहिए कि आखिर शरीर में वो किस हिस्से में मौजूद है।ऐसा होने पर आप इस ट्रैफिक को सुचारू रुप से चला सकते हैं। सड़कों पर तो इन ट्रैफिक जंक्शनों के बारे में बात की जा चुकी है लेकिन शरीर में ये जंक्शन कहां मौजूद होते हैं। बता दें शरीर में सबसे सामान्य जंक्शनों जहां बॉटल नेक पाया जाता है वो हैं शरीर के जोड़ और गर्दन। जिसकी वजह से व्यक्ति को दर्द महसूस होने के साथ हिलाना भी मुश्किल हो जाता है। मैं अपने अगले लेख में इसके बारे में लिखूंगी, लेकिन इस लेख में गर्दन की मूवमेंट को रोकने वाले जाम के बारे में बात करते हैं।
गर्दन शरीर और मस्तिष्क के बीच का मुख्य भाग होता है। गर्दन को स्वस्थ रखना हमारी प्राथमिकता होना चाहिए। इतना ही नहीं गर्दन शरीर का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला अंग होने की वजह से समस्याओं से भी ग्रस्त रहती है। अपने पिछले लेख में मैंने एक कार्टून की मदद से बताने की कोशिश की थी कि कैसे चिंपांजियों से मनुष्य का विकास हुआ था और एक बार फिर हमारे शरीर की मुद्रा मनुष्य से चिंपांज़ी जैसी होती जा रही है। हमारा सिर आगे की तरफ झुकना शुरू हो गया है और हमारे कंधे कठोर हो गए हैं। ऐसा इसलिए भी है शायद क्योंकि आज हमने अपने कंधों से ज्यादा अपनी उंगलियों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
अब वक्त आ गया है कि हम अपने कंधों पर काम करें। आज मैं आपको दो आसान से आसन बताने जा रही हूं। ऊर्ध्व हस्तासन और ऊर्ध्व बद्धअंगुलियासन। ऊर्ध्व का अर्थ है ऊपर की ओर, हस्त मतलब हाथ। बद्ध मतलब बंद और उंगलिया मतलब हाथ की उंगलियां। जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है कि पहले आसन में हाथों को ऊपर की ओर उठाना है जबकि दूसरे आसन में हाथों की उंगलियों को इंटरलॉक करना है।इन सब बातों में ध्यान देने वाली बात ये है कि इन आसनों को करने के दौरान आपको अपने हाथ बिल्कुल सीधे रखने हैं। आपका कंधा उंगलियों की टिप की लाइन में सीधा रहे।
आपका हाथ कानों को छूता हुआ सीधा रहे। इस तरह आप अपने गर्दन के दर्द को होने से रोक सकते है। अगर आप इत्तेफाकन अपने हाथों को उपर की दिशा में उठाते रहते हैं तो कुछ समय बाद आप अपने हाथ के ऊपरी तरफ भारीपन महसूस करने लगेंगे। ये बिल्कुल वैसा ही है जैसे पहले समय में बच्चों को दंड दिया जाता था, लेकिन आप अपना ध्यान अगर उंगलियों पर लगाकर उन्हें ऊपर की तरफ खींचेगे तो आप कंधों को सीधा पाएंगे साथ ही आपकी कोहनी फर्म और लॉक हो जाएंगी। इतना ही नहीं ऐसा करने से आपके कंधे के जोड़ में आरामदायक गैप भी आ सकता है।
आप ऊर्ध्व हस्तासन से ऊर्ध्व बद्धअंगुलियासन भी कर सकते हैं। जानिए इस आसन को कैसे कर सकते हैं।
1-ऊर्ध्व हस्तासन की अवस्था में रहते हुए अपनी बांहों के साथ कोहनियों को हल्का सा मोड़ें।
2-इसके बाद उंगलियों को इंटरलॉक करके हथेलियों को छत की तरफ मोड़ें।
3.अब सांसों को सामान्य कर लें। इसके बाद सांसों को बाहर छोड़ते हुए कोहनियों को पीछे की तरफ हल्का सा हिलाएं।
4-ऐसा करने के बाद श्वास को अंदर की तरफ खींचते हुए हथेलियों को ऊपर की तरफ उठाते हुए बांहों को सीधा करें।
5-ध्यान रखें कि हथेलियों को ऊपर उठाते समय आपकी हथेलियां मुड़ने ना पाएं।आपकी कोहनियां आपके सिर की सीध में रहें।
6- इसे ऊर्ध्व बद्धअंगुलियासन कहते हैं। आप इस स्थिति में तब तक बने रहें जब तक आप सामान्य रूप से सांस ले पा रहे हो।
7- इसके बाद सांस को छोड़ते हुए उंगलियों के इंटरलॉक को खोलते हुए अपनी बांहों को नीचे की तरफ लाएं।
8-उंगलियों के इंटरलॉक को बदल-बदलकर आसन को दोहराएं।
आज भले ही हमें अपने पूर्वजों की तरह अपने कंधों का ज्यादा इस्तेमाल करने की जरूरत न पड़ती हो लेकिन याद रखें कि हमारे कंधे गर्दन से जुड़े हुए हैं और अगर गर्दन का ट्रैफिक रूकेगा तो इसका असर आपके दिमाग पर जरूर पड़ेगा।