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बुखार हो जाए तो इग्नोर न करें, देखिए कितने बड़े खतरे में हैं आप...छोटी सी चूक जान ले लेगी

Thu, 05 Jul 2018 09:57 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 05 Jul 2018 09:57 AM IST
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chandigarh, Don't be afraid to Dengue, symptumos and precautions
डेंगू की बीमारी
बुखार हो जाए तो इग्नोर न करें, आप बहुत बड़े खतरे में हो सकते हैं। जान लीजिए बचाव ही उपाय है, वरना एक छोटी सी चूक भी जान ले लेती है। हम आपको बता रहे हैं कि एक ऐसी बीमारी के बारे में जो मौसमी है और जानलेवा साबित हो सकती है।
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डेंगू की बीमारी
बारिश के दिन हैं और इस मौसम में डेंगू और मलेरिया का खतरा बढ़ जाता है। इस दौरान छोटी सी चूक से लोग डेंगू की चपेट में आ सकते हैं और लापरवाही पर जान से हाथ भी धोना पड़ सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इससे बचने का फुलप्रूफ तरीका एक ही है कि मच्छरों को पनपने से रोका जाए। रूटीन में कुछ आसान तरीके अपनाकर आप अपने और आसपास के लोगों को डेंगू से बचा सकते हैं। 
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डेंगू की बीमारी
कैसे होता है डेंगू
डेंगू का बुखार एडीज मच्छर के काटने से होता है। जुलाई से लेकर अक्टूबर के महीने में लगातार बारिश होने के कारण एडीज मच्छर पनपते हैं। इस दौरान सबसे ज्यादा डेंगू का प्रकोप होता है। यह मच्छर साफ पानी में ही पनपते हैं। इन मच्छरों का प्रकोप ज्यादातर दिन के वक्त ही होता है। जब कोई एडीज मच्छर काटता है तो वह इंसान का खून चूसता है और ब्लड में डेंगू का वायरस छोड़ देता है फिर अगर वही मच्छर दूसरे व्यक्ति को काट लेता है तो वो भी डेंगू की चपेट में आ जाता है।

 
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consult doctor
डेंगू के लक्षण
ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार चढ़ना, सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना। आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना, जो आंखों को दबाने या हिलाने से और बढ़ जाता है। बहुत कमजोरी लगना, भूख न लगना और जी मितलाना और मुंह का स्वाद खराब होना। शरीर खासकर चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल-गुलाबी रंग के रैशेज होना। नाक, मसूढ़ों, शौच या उलटी में खून आना। चूंकि यह एक वायरस से होता है इसलिए इसकी कोई दवा या एंटीबायटिक नहीं है, इसका इलाज इसके लक्ष्णों का इलाज करके ही किया जाता है। तेज बुखार बीमारी के पहले से दूसरे हफ्ते तक रहता है।
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डेंगू की बीमारी
मच्छरों को पैदा होने से रोकने के उपाय
घर के आसपास पानी जमा न होने दें। जहां पानी भरने की गुंजाइश हो, उसे तुरंत बंद कर दें। जहां अक्सर पानी जमा होता हो और उसे रोकना मुश्किल हो तो वहां पर पेट्रोल, डीजल, केरोसिन या सरसों का तेल डालें। हफ्ते में एक दिन खासकर छुट्टी वाले दिन कूलर, फूलदान, पक्षियों को दाना-पानी देने के बर्तन को पूरी तरह से खाली करें। उन्हें सुखाएं और फिर पानी भरें। घर की छत या बालकनी में टूटे-फूटे डिब्बे, टायर, बर्तन, बोतलें आदि न रखें। अगर रखें तो उलटा करके रखें। डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं, इसलिए पानी की टंकी को अच्छी तरह बंद करके रखें।
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