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Yoga Tips: सेंडेंटरी लाइफस्टाइल वालों को लिए बहुत कारगर है ब्रिज पोज का अभ्यास, जानिए इसके क्या फायदे हैं?

Mon, 23 May 2022 11:53 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 23 May 2022 11:53 AM IST
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Bridge Pose Yoga Benefits for Sedentary Lifestyle, Setu Bandhasana ke fayde
सेंडेंटरी लाइफस्टाइल वालों के लिए योग - फोटो : istock

सेंडेंटरी लाइफस्टाइल या जीवनशैली में गतिहीनता को मौजूदा समय में बढ़ रही कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख कारण माना जा रहा है। गतिहीन जीवशैली का मतलब, एक ही जगह पर लगातार बैठे रहने या शारीरिक गतिविधियों में कमी से है। इसके कारण ब्लड सर्कुलेशन की समस्याओं के साथ मांसपेशियों और हड्डी में कमजोरी की दिक्कत कम उम्र के लोगों में भी देखी जा रही है। इतना ही नहीं बढ़ते डायबिटीज और हृदय रोगों के लिए भी सेंडेंटरी लाइफस्टाइल को प्रमुख जोखिम कारक के तौर पर देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक सभी उम्र के लोगों को इस तरह की समस्याओं से बचे रहने के लिए शारीरिक गतिविधियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।



स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक सेंडेंटरी लाइफस्टाइल के जोखिमों को दूर करने के लिए दिनचर्या में योगासनों को शामिल करना बेहतर विकल्प हो सकता है। योगासनों के अभ्यास से मांसपेशियों की सक्रियता बढ़ती है, साथ ही उम्र के साथ होने वाली हड्डियों की दिक्कतों को भी कम किया जा सकता है।

योग विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर कम उम्र से ही नियमित योगाभ्यास की आदत बना ली जाए तो आगे चलकर कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे से बचाव किया जा सकता है। दिनचर्या में ब्रिज पोज योग को शामिल करना आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।

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रोजाना सेतुबंधासन योग के लाभ - फोटो : Pixabay

ब्रिज पोज या सेतुबंधासन

ब्रिज पोज योग काफी सुरक्षित और शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी योगाभ्यास है। ब्रिज पोज़ को बैकबेंड के रूप में वर्गीकृत किया गया है। शारीरिक सक्रियता को बढ़ाने के साथ पीठ, रीढ़ और कमर की तमाम दिक्कतों को कम करने के लिए रोजाना इस योग का अभ्यास किया जा सकता है। 

सेतुबंधासन योग करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं और हाथों को बगल में रखें। अब धीरे-धीरे अपने पैरों को घुटनों से मोड़कर हिप्स के पास ले आएं। हिप्स को जितना हो सके फर्श से ऊपर की तरफ उठाएं। कुछ देर के लिए इस स्थिति में सांस को रोककर रखें और फिर सांस छोड़ते हुए वापस पूर्ववत अवस्था में आ जाएं।

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सेतुबंधासन के लाभ - फोटो : pixabay

सेंडेंटरी लाइफस्टाइल दूर करने में सेतुबंधासन के लाभ

सेतुबंधासन योग शारीरिक निष्क्रियता की समस्या को दूर करते हुए मांसपेशियों और हड्डियों को स्वस्थ रखने और रक्त का संचार बढ़ाने में काफी कारगर अभ्यास माना जाता है। इस योग का नियमित अभ्यास शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत को ठीक रखने में विशेष लाभप्रद हो सकता है। सेंडेंटरी लाइफस्टाइल के शिकार लोगों को दिनचर्या में इस योग को जरूर शामिल करना चाहिए।

  • तनाव और अवसाद के लक्षणों को कम करता है।
  • पेट, फेफड़े और थायराइड के अंगों को उत्तेजित करके इससे संबंधित बीमारियों के जोखिम को कम करता है।
  • पैरों में रक्त के संचार को बढ़ाकर मांसपेशियों को स्वस्थ बनाए रखने में विशेष लाभदायक है।
  • पाचन में सुधार करने वाला योगाभ्यास। 
  • पीठ, ग्लूट्स, टांगों और टखनों को मजबूत बनाता है।
  • सेंडेंटरी लाइफस्टाइल के कारण जिन लोगों को अक्सर कमर, पीठ में दर्द रहती है, उनके लिए इस योग का अभ्यास विशेष फायदेमंद हो सकता है।
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सेतुबंधासन के क्या फायदे हैं? - फोटो : istock

सेतुबंधासन योग को लेकर सावधानियां

वैसे तो सेतुबंधासन योग, सभी लोगों के लिए काफी सुरक्षित अभ्यास में से एक है, इससे किसी तरह का नुकसान नहीं होता है, हालांकि आपको हमेशा अपने चिकित्सक से परामर्श के बाद भी किसी अभ्यास या व्यायाम की शुरुआत करनी चाहिए। प्र

शिक्षित योग शिक्षक की निगरानी में इस अभ्यास को करना ज्यादा बेहतर माना जाता है। जिन लोगों को गर्दन में या हाथ में चोट लगी हो उन्हें इसके अभ्यास से बचना चाहिए। हाल ही में यदि आपकी सर्जरा या कोई फ्रेक्चर हुआ है तो भी डॉक्टर की सलाह के बाद ही यह अभ्यास करें। 


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नोट:
यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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