Baba Ramdev Yoga Tips: अमर उजाला संवाद, हरियाणा के मंच पर योग गुरू बाबा रामदेव पहुंचें। जोशिले अंदाज में उन्होंने आज की आम स्वास्थ्य समस्याओं के निवारण के लिए कई उपाय बताए। योग के माध्यम से प्रदूषण से बचाव के बारे में बताया। उन्होंने दिल्ली के एक्यूआई को कम करने का भी तरीका बताया। साथ ही सरकार के साथ, नागरिकों को अपना कर्तव्य निभाने की अपील की। आज हरियाणा के गुरुग्राम में उन्होंने योग की संस्कृति और 'सनातन की बात' विषय पर विस्तार से अपनी बातें रखीं। आइए जानते हैं योग और आयुर्वेद को घर-घर में लोकप्रिय बनाने वाले रामदेव ने प्रदूषण से बचाव के लिए क्या सुझाव दिए।
फेफड़े कमजोर होंगे तो प्रदूषण पेट में ही जम जाएंगा
बाबा राम देव ने मंच पर आते ही बताया कि प्रदूषण का प्रभाव उन लोगों पर ही ज्यादा होता है, जिनके फेफड़े कमजोर होते हैं। अगर आपके फेफड़े मजबूत होंगे तो प्रदूषण से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है। फेफड़ों की मजबूती के लिए योगासन और प्राणायाम कर फिटनेस का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि कपालभाति, अनुलोम-विलोम जैसे विकल्पों को अपनाकर हम वायु प्रदूषण की चुनौती से निपट सकते हैं। उन्होंने मंच पर ही भ्रामरी और उद्गीथ प्राणायाम का अभ्यास करके दिखाया। योगगुरु ने कहा कि लंबी सांस लेने से फेफड़े ताकतवर होते हैं। जिनके फेफड़े मजबूत होंगे उनपर कोई प्रदूषण असर नहीं डालता। इससे 365 दिनों तक सर्दी-जुकाम, बुखार कुछ भी नहीं होता। एक होता है बीएमआई एक होता है बीआरआई यानी बाॅडी राउंड इंडेक्स। यह सही संतुलन में होना चाहिए।
2 of 4
अमर उजाला संवाद के मंच पर योगगुरु स्वामी रामदेव
- फोटो : अमर उजाला
आइए जानते हैं कैसे करें कपालभाति
कपालभाति का अभ्यास कैसे करें?
कपालभाति का अभ्यास करने के लिए आराम से बैठें। पेट को अंदर की ओर खींचते हुए सांस जोर से बाहर छोड़ें। इसे 30 से 60 स्टोक करें। यह प्राणायाम फेफड़ों की सफाई करने में मदद करता है और खांसी व बलगम को कम करता है। इससे सर्दी-खांसी में तेजी से राहत मिलती है। साथ ही साइनस की समस्या भी कम होती है। कपालभाति का नियमित अभ्यास फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाता है।
3 of 4
प्राणायाम
- फोटो : Freepik.com
अनुलोम-विलोम कैसे करेंगे?
अनुलोम-विलोम प्राणायाम के अभ्यास के लिए दाहिने नथुने को बंद कर बाएं से सांस लें। फिर बाएं को बंद कर दाएं से सांस बाहर छोड़ें। इस क्रिया को पांच से 10 मिनट तक करें। यह सर्दी और खांसी में सबसे लोकप्रिय योग तकनीक है। अनुलोम विलोम का अभ्यास नासिका मार्ग खोलता है और फेफड़ों को मजबूती देता है। यह प्राणायाम श्वसन तंत्र में ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर बनाता है। खांसी और जकड़न में राहत देता है और इम्यूनिटी को बूस्ट करता है।
4 of 4
भ्रामरी प्राणायाम (Bee Breathing)
- फोटो : इंस्टाग्राम
भ्रामरी प्राणायाम कैसे करें?
इस प्राणायाम के अभ्यास के लिए आंखें बंद करें। अंगूठों से कान बंद करें, नाक से सांस लेकर "म्म..." की गूंज करें। सर्दियों में भ्रामरी प्राणायाम से एंग्जाइटी और डिप्रेशन से बचाव होता है। ये आसन दिमाग को शांत करता है, नींद की गुणवत्ता बढ़ता है।