Year Ender 2022 : कोविड 19 संक्रमण ने लोगों के जीवन पर गहरा असर डाला। कोरोना वायरस के फैलने से देश दुनिया के लोगों की सेहत पर ही प्रभाव नहीं पड़ा, बल्कि लोगों के सामाजिक, मानसिक और आर्थिक जीवन पर भी असर पड़ा। लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव आया। भारत के संदर्भ में बात करें तो कोरोना काल में जो बदलाव यहां देखे गए, वह आजतक नहीं हुए थे। लॉकडाउन के बाद कई तरह की पाबंदियां, वर्क फ्राॅम होम कल्चर की शुरुआत और शिक्षा पद्धति में बदलाव को सबने महसूस किया। बच्चों से लेकर बड़े तक कोरोना काल में हुए बदलावों से प्रभावित हुए। साल 2020 में पहली बार लॉकडाउन लगा। स्कूल बंद हो गए। ऑनलाइन शिक्षा पद्धति की शुरुआत हुई। साल 2021 में छात्रों के लिए वैकल्पिक तौर पर स्कूल खुले। वहीं साल 2022 में एक बार पुन: बच्चे स्कूल पहुंचे। कोरोना काल के दो सालों में बाद जब बच्चे 2022 में पुरानी वाले स्कूली जीवन में लौटे, तो बहुत कुछ उनकी जीवनशैली में बदल चुका था। आइए जानते हैं कोरोना के बाद स्कूल लौटे बच्चों के जीवन में आए क्या बदलाव।
Year Ender 2022: कोरोना काल के दो साल बाद स्कूल पहुंचे बच्चों की जीवनशैली में आए ये बदलाव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लिखने का अभ्यास छूटा
दो साल से घर से ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले बच्चों के लिखने का अभ्यास छूट गया। कोरोना काल में ऑनलाइन क्लास के दौरान शिक्षक उनकी काॅपी चेक नहीं कर पाते थे और न ही लिखावट संवारने पर काम कर पाते थे। मौखिक पढ़ाई का ट्रेंड बढ़ गया। बच्चे भी पहले जिस तरह काॅपी भर भर के लिखा करते थे, वह आदत स्कूल वापस पहुंचने के बाद छूट गई। शुरू में जब उन्हें स्कूल में लिखने को कहा गया तो किसी की कलाई में दर्द हुआ तो किसी की लिखावट सुंदर नहीं रही।
घंटों क्लास में बैठना हुआ मुश्किल
घर से पढ़ाई करने और स्कूल में पढ़ाई में एक बड़ा अंतर है। ऑनलाइन क्लास के दौरान बच्चे घर पर आराम से बिस्तर पर बैठकर या सोफे पर बैठकर पढ़ते थे, लेकिन जब बच्चे लंबे समय बाद स्कूल पहुंचे और उन्हें स्कूल की सीट पर बैठना हुआ तो वह कुछ घंटे भी बैठ न सके। बच्चों को पीठ और कमर दर्द की शिकायत बढ़ी। घर पर लेटे लेटे ऑनलाइन क्लास लेने वाले बच्चे बेंच पर बैठकर थक गए। इसकी एक वजह घर पर रहकर शारीरिक अभ्यास में कमी आना भी रही।
आत्मविश्वास में आई कमी
बच्चे स्कूल जाते हैं तो वह अपने जैसे कई बच्चों के संपर्क में आते हैं। वहीं जब भरी क्लास में शिक्षक उन्हें खड़ा करके कोई सवाल करते हैं तो बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई के कारण बच्चे इन सब चीजों से वंचित रहें। वहीं जब बच्चे कोरोनाकाल के बाद स्कूल पहुंचे तो उनमें आत्मविश्वास की कमी पाई गई। बेसिक ज्ञान की कमी या भीड़ के बीच खड़े होकर जवाब देने की क्षमता में कमी आने कारण बच्चों का आत्मविश्वास कम हो गया। बच्चों का संवाद भी खराब हो गया।
पहली बार स्कूल पहुंचे बच्चों के लिए दिक्कत
जिन नए बच्चों का दाखिला दो साल पहले स्कूल में हो जाना चाहिए था, कोरोना के कारण वह दो साल तक पढ़ाई वंचित रहे। कुछ अभिभावकों ने उनका दाखिला करा दिया लेकिन क्लास ऑनलाइन होने के कारण बच्चों ने स्कूल देखे ही नहीं। 2022 में भले ही पहली बार वह स्कूल जाकर खुश हुए लेकिन उनमें बेसिक ज्ञान की कमी पाई गई। जिन उम्र में उन्हें स्कूली शिक्षा दी जानी थी, उस समय उन्हें अनुशासन सिखाने की जरूरत महसूस की गई। बच्चों को उनके क्लास से जूनियर क्लास की किताबें पढ़ाने की जरूरत को महसूस किया गया।