अस्थमा सांस से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। इस बीमारी के दौरान गला व छाती काफी प्रभावित हो जाता है। अस्थमा के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल मई महीने के पहले मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस मनाया जाता है। गर्मी के मौसम में अस्थमा के मरीजों की परेशानियां और बढ़ जाती है। इसका सबसे मुख्य कारण है इस मौसम में गर्म हवाओं के साथ आने वाले धूलकण। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि गर्मी के मौसम में अस्थमा के मरीजों को खुद का ख्याल कैसे रखना चाहिए...
अस्थमा के कारण श्वसन नलिकाएं प्रभावित होती हैं। ये श्वसन नलिकाएं फेफड़ों से हवा को अंदर-बाहर करने का काम करती हैं। अस्थमा होने के कारण इन नलिकाओं में सूजन हो जाती है और फेफड़ों तक हवा पहुंचने में परेशानी होती है। अस्थमा का दौरा पड़ने पर नलिकाएं बंद हो जाती हैं। अस्थमा का अटैक होने पर मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है। यह अटैक कुछ वक्त के लिए होता है और अगर ज्यादा वक्त तक रह गया तो मरीज की जान भी जा सकती है।
धूल और प्रदूषण
गर्मी के मौसम में धूल ज्यादा उड़ती है। इससे भी एलर्जी होने के साथ-साथ व्यक्ति अस्थमा का भी शिकार हो जाता है। इस बीमारी का शिकार बच्चे बहुत तेजी से होते हैं। समय पर और नियमित उपचार व परहेज करने पर इसके असर को नियंत्रित कर सकते हैं।
सर्द-गर्म की समस्या
गर्मी और ठंड दोनों मौसम में अस्थमा का शिकार व्यक्ति हो सकता है। गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर या अन्य माध्यम से व्यक्ति अगर गर्म से एकाएक ठंड या ठंड से एकाएक गर्म में जाने से एलर्जी होती है। बारिश के मौसम में अस्थमा के मरीजों में 20 से 25 प्रतिशत का इजाफा हो जाता है। चिकित्सकों के अनुसार ऐसा मौसम बदलने के कारण हो सकता है। दरअसल, अस्थमा का कारण इंफेक्शन भी होता है।
अस्थमा की शिकायत बच्चों में ज्यादा होती है। इसका मुख्य कारण है कि बच्चे धूप से घर में आते ही ठंडा पानी पी लेते हैं या कोई ठंडी चीज खा लेते हैं, जिससे बच्चों में खांसी, कफ व गले का इंफेक्शन हो जाता है। दूसरे बच्चों के अलावा अस्थमा से ग्रसित बच्चों को इंफेक्शन होने पर सांस लेने में बहुत दिक्कत आती है। अस्थमा रोग से ग्रसित बच्चों के साथ-साथ सामान्य बच्चों को एलर्जी से बचाने के लिए उनका अच्छे से ख्याल रखें। बच्चों को गर्मी से बचाएं। धूप से आने पर तुरंत ठंडी चीज न दें। इसके अलावा इंफेक्शन होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।