असत्य पर सत्य की जीत का पर्व विजया दशमी यानी की दशहरा 8 अक्टूबर को मनाया जाने वाला है। मां भगवती की आराधना यानी की नवरात्रि के नौ दिन पूरे होने के बाद दशमी तिथि को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने लंकाधिपति दशानन का वध कर सीता को छुड़ाया था। दशानन जिसे रावण के तौर पर जानते हैं बहुत बड़ा विद्वान था। लेकिन सीता माता के हरण करने पर पूरे विश्व में राक्षस कहलाने लगा। रावण शिव जी का बहुत बड़ा भक्त था। उसके विद्वानता के कारण भारत में कई जगह पर उसके मंदिर हैं। जिन जगहों पर रावण का मंदिर है वहां के लोग उसे भगवान मानते हैं। आज हम आपको भारत के उन 5 जगहों के बारे में बताएंगे जहां रावण की पूजा होती है...
Vijayadashami 2019: भारत की वो पांच जगह जहां हैं 'रावण' के मंदिर, दशहरा के दिन यहां मनता है शोक
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कर्नाटक राज्य के कोलार में लंकेश्वर महोत्सव के दौरान रावण की पूजा के साथ जुलूस भी निकाला जाता है। इस जुलूस में रावण के साथ भगवान शिव जी की मूर्ति को घुमाया जाता है। भगवान शिव का परम भक्त होने के कारण कोलार में रावण की पूजा की जाती है। कोलार के मालवल्ली तहसील में रावण का एक मंदिर भी है।
विदिशा, मध्य प्रदेश
विदिशा रावण की पत्नी मंदोदरी का जन्म स्थान है। यहां पर रावण की 10 फीट लंबी प्रतिमा है। विदिशा में दशहरे की दिन लोग रावण की पूजा करते हैं। इसके अलावा शादी-विवाह या किसी अन्य शुभ अवसर पर लोग इस मूर्ति की पूजा कर आशीर्वाद लेते हैं।
मंदसौर, मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के मंदसौर में बना मंदिर रावण का पहला मंदिर है। यहां पर रावण की रुण्डी नाम की विशाल मूर्ति है जिसकी पूजा की जाती है। इस मंदिर में पूजा करने के दौरान मूर्ति के सामने महिलाएं घूंघट में रहती हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रावण को मंदसौर का दामाद माना जाता है। मंदसौर मंदोदरी का मायका है। मंदोदरी के नाम पर ही इस जगह का नाम मंदसौर पड़ा।
बैजनाथ कस्बा, हिमाचल प्रदेश
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बैजनाथ कस्बा में रावण ने भगवान शंकर की कठोर तपस्या की थी। वैसे तो बैजनाथ कस्बा में रावण का कोई मंदिर नहीं है लेकिन यहां पर रावण की पूजा की जाती है। हिमाचल प्रदेश के इस जगह पर रावण का कोई पुतला भी नहीं जलाया जाता है।