गुजरात वरिष्ठ नागरिकों की यात्रा के लिए देश के श्रेष्ठ स्थानों में से एक है। उसके पीचे मुख्य कारण यह है कि हमारे देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से दो यहां पाए जाते हैं। शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से पहला ‘श्री सोमनाथ’और बारहवां ‘श्री नागेश्वर’दोनों के ही दर्शन गुजरात में हो जाते हैं। इसके साथ ही द्वारका के दर्शन को लेकर तो बुजुर्ग बहुत उत्साहित रहते हैं। जिन लोगों ने मथुरा- वृंदावन की यात्रा की होती है वे द्वारका भी जरूर जाते हैं। अगली स्लाइड्स में जानिए कि गुजरात में मौजूद इन मंदिरों और दर्शनीय स्थलों में ऐसा क्या है खास जो बुजुर्गों को करता है आकर्षित।
बुजुर्गों के लिए स्वर्ग से कम नहीं हैं ये जगहें, एक बार तो जरूर जाना चाहिए
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श्री सोमनाथ मंदिर
श्री सोमनाथ मंदिर की बनावट एक पारंपरिक हिंदू मंदिर की तरह है। मंदिर तीन मुख्य भागों में विभाजित है जिसमें गर्भगृह, सभा मंडप और नृत्य मंडप शामिल है। ये मंंदिर 150 फुट ऊँचा है और इस पर 10 टन का कलश चढ़ा हुआ है। गर्भगृह में सोने का शिवलिंग है। मंदिर पर आक्रमणकारियों ने बार-बार आक्रमण किया लेकिन इसका पुनर्निर्माण होता रहा। मंदिर के एक तरफ विशाल समुद्र तट है और दूसरी तरफ एक छोटा सा बाजार है।
द्वारका मंदिर
द्वारका भारत की सबसे प्राचीन नगरियों में से एक है। द्वारका मंदिर की बनावट पुराने और व्यवस्थित मंदिरों जैसी ही है। द्वारका के मंदिर में स्वयं द्वारकाधीश विराजमान हैं। श्री कृष्ण ने अपना बचपन और युवावस्था वृंदावन और मथुरा में बिताई है और शेष संपूर्ण जीवन उन्होंने द्वारका में बिताया है इसलिए लोग द्वारका की भूमि को स्पर्श करके ही स्वयं को धन्य मानने लगते हैं। यहां की ऊर्जा मनुष्य के मन को शांति पहुंचाती है।
नागेश्वर मंदिर
नागेश्वर मंदिर के परिसर में भगवान शिव की विशालकाय प्रतिमा पद्मासन मुद्रा में विराजमान है जो 125 फुट ऊंची और 25 फुट चौड़ी है। मंदिर के तलघर में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग हैं। इस पिंड को नागेश्वर महादेव भी कहा जाता है। यहां चारों ओर शिव मंत्रों का जप चलता ही रहता है जिससे कि यहां का वातावरण बहुत पवित्र रहता है जो कि मन की सारी अशांति और भय को दूर कर देता है।
गुजरात का सूर्यास्त
इन तीनों ही मंदिर से सूर्यास्त बहुत अच्छा दिखाई देता है। इसके पीछे वजह यह है कि गुजरात एक पश्चिमी राज्य है। दिनभर घूमने के बाद बुजुर्ग सांझ को मंदिरों के प्रांगण में बैठकर ही सूर्यास्त देखेंगे तो उनका मन खुश हो जाएगा। विशेषकर द्वारका के पीछे स्थित समुद्र तट से सूर्यास्त देखने का तो अनुभव अनुपम होता है इसलिए यहां पहुंचने पर सूर्यास्त तो जरूर देखना चाहिए।