भारत के इतिहास की जड़ें बहुत गहरी है। इतने सालों में इस देश में जाने कितने ही राज्य बने, कितने ही शासकों ने राज्य किया और समय के साथ प्रदेशों के नाम भी बदलते गए। घर में यदि किसी छोटे बच्चे का जन्म होता है तो उसका नाम रखने में भी घर वालों को न जाने कितने दिन बीत जाते हैं। नाम का अर्थ, शिशु के गुण आदि पर विचार किया जाता है तो यह तो तय बात है कि देश की इन पुरानी नगरियों के नाम भी यूं ही तो नहीं रख दिये गए होंगे। अगली स्लाइड्स से जानिए भारत के इन पुरान शहरों के प्राचीन नाम और उनसे जुड़ी कथाओं के बारे में।
सालों पहले गुवाहटी को क्यों कहा जाता था प्राग्ज्योतिषपुर? जानिए भारत के प्रसिद्ध शहरों के रोचक प्राचीन नाम
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प्राग्ज्योतिषपुर
वर्तमान की गुवाहटी को प्राग्ज्योतिषपुर कहा जाता था।आदिकाव्य रामायण, महाभारत और पुराणों में इसका उल्लेख मिलता है। यह कामरूप की प्राचीन राजधानी थी। कालिकापुराण के अनुसार ब्रह्माजी ने यहां नक्षत्रों का निर्माण किया था इसलिए यह नगर प्राक् (प्राचीन या पूर्व) और ज्योतिष (नक्षत्र) कहलाया।
भाग्यनगर
आज का हैदराबाद किसी समय भाग्यनगर भी कहलाता था। कुतुबशाही शासक मुहम्मद कुली कुतुब शाह (1580-1612 ईस्वी) ने भाग्यमती नामक स्त्री के नाम पर भाग्यनगर की स्थापना की थी। उसने ही प्रसिद्ध चारमीनार का निर्माण करवाया था। अबुल फज़ल द्वारा रचित अकबरनामा में भी भाग्यनगर का ज़िक्र मिलता है।
अजयमेरु
राजस्थान में स्थित अजमेर को ही अजयमेरु कहा जाता था। चौहान राजा सोमेश्वर के बिजहोली शिलालेख (विक्रम संवत 1226) पर अजयमेरु का नाम मिलता है। अधिकतर इतिहासकारों के मतानुसार चौहान राजा अजयदेव या अजयराज ने 1100 से 1125 ईस्वी में अजयमेरु की स्थापना की थी।
पेशावर किसी समय पुरुषपुर कहलाता था. ईसा की दूसरी शताब्दी में कुषाण सम्राट कनिष्क ने पुरुषपुर बसाकर उसे अपनी राजधानी बनाया था। यह गांधार मूर्तिकला का प्रसिद्ध केंद्र था। इसका सामरिक महत्व भी अधिक था क्योंकि यह भारत के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले यह खैबर दर्रे पर स्थित था।