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मेंटल हेल्थ: एंग्जाइटी तो सुना है पर ये रिंगजाइटी क्या है? इसमें क्या दिक्कतें होती हैं, मनोचिकित्सक ने समझाया

Mon, 07 Sep 2026 03:07 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 07 Sep 2026 03:07 PM IST
सार

रिंगजाइटी में मोबाइल की घंटी, वाइब्रेशन या नोटिफिकेशन आने का एहसास होता है, जबकि वास्तव में फोन नहीं बजा होता। यह फोन के ज्यादा इस्तेमाल, किसी कॉल की प्रतीक्षा और चिंता से जुड़ा हो सकता है। कभी-कभार ऐसा होना आम है, लेकिन बार-बार होने पर फोन इस्तेमाल और तनाव पर ध्यान देना जरूरी है।

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what is Ringxiety Why You Hear Phone Ring When It Does not know phantom phone ringing
मोबाइल की रिंग सुनाई देने की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI

मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं दुनियाभर के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं। कम उम्र के लोग भी स्ट्रेस-एंग्जाइटी और डिप्रेशन जैसी दिक्कतों का शिकार देखे जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मेंटल हेल्थ का ठीक रहना, पूरी सेहत को ठीक रखने के लिए जरूरी माना जाता है। आमतौर पर लोग शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा अलर्ट रहते हैं, पर इसकी तुलना में मानसिक स्वास्थ्य पर कम ध्यान देते हैं। जबकि कई अध्ययनों में ये साबित हो चुका है कि मेंटल हेल्थ में किसी भी तरह की गड़बड़ी का असर आपके शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।



एंग्जायटी यानी घबराहट होना, तनाव या किसी अनिश्चित स्थिति के प्रति शरीर की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। इसके कारण दिल की धड़कन तेज होने से लेकर , सांस फूलने और जरूरत से ज्यादा पसीना आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। एंग्जाइटी वैसे तो बहुत कॉमन समस्या है, पर क्या आपने रिंग्जाइटी के बारे में सुना है? 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, रिंग्जाइटी की समस्या युवाओं में तेजी से बढ़ती जा रही है। रिंग्जाइटी शब्द रिंग और एंग्जाइटी से मिलकर बना है। इसमें व्यक्ति को अक्सर लगता रहता है कि उसका फोन बज रहा है या उसमें नोटिफिकेशन आया है? पर असलियत में ऐसा होता नहीं है। क्या आप भी इस तरह की समस्याओं का अनुभव करते हैं?

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फोन के रिंग करने की समस्या - फोटो : Freepik.com

फैंटम रिंगिग या फैंटम फोन सिंगल्स की समस्या

मेडिकल साइंस में  रिंग्जाइटी को फैंटम रिंगिग या फैंटम फोन सिंगल्स भी कहा जाता है। इसमें केवल ऐसा नहीं लगता है कि फोन की घंटी सुनाई दे रही है बल्कि फोन के वाइब्रेट होने या नोटिफिकेशन आने का एहसास भी हो सकता है। जबकि वास्तिवकता में न तो फोन बज रहा होता है और न ही कोई नोटिफिकेशन आया होता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ये सुनने में भले ही छोटी बात लगे, लेकिन लगातार फोन से लगे रहने वाले लोगों में या किसी की कॉल का इंतजार करते समय ये समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती है।
 

  • साल  2016 के एक अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों में अटैचमेंट एंग्जाइटी (रिश्तों के टूटने या प्रियजनों द्वारा छोड़े जाने का अत्यधिक डर) रहती है, उनमें फैंटम रिंगिग की शिकायत ज्यादा देखी गई। 
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मोबाइल बार-बार देखना - फोटो : Adobe stock

कहीं आपको भी तो नहीं है ये दिक्कत?

अगर आप भी बार-बार बिना वजह फोन देखते रहते हैं,, फोन न बजने पर भी लगता है कि कानों में फोन रिंग सुनाई दे रही है या वाइब्रेशन महसूस हो रहा है तो ये रिंग्जाइटी की तरफ इशारा हो सकता है।
 

  • किसी कॉल या मैसेज का लगातार इंतजार करना और फोन चेक करने के बाद पता चलना कि कोई नोटिफिकेशन आया ही नहीं। 
  • अगर यह अनुभव कभी-कभार हो और व्यक्ति को परेशान न करे, तो आमतौर पर इसे गंभीर समस्या नहीं माना जाता। 
  • लेकिन बार-बार होने पर इसपर गंभीरता से ध्यान देते रहना जरूरी हो जाता है। 
  • बड़ी संख्या में युवा इसका शिकार देखे जा रहे हैं। 
  • इसके अलावा पहले से ही स्ट्रेस-एंग्जाइटी या फिर मेंटल हेल्थ की समस्याओं के शिकार लोगों में भी ये दिक्कत ज्यादा देखी जाती है।
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रिंग्जाइटी की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : Adobe stock

क्यों होती है ये समस्या?

वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी बताते हैं, रिंग्जाइटी को मानसिक बीमारी नहीं माना जाता। यह तब होता है जब लगातार स्मार्टफोन के इस्तेमाल करने की वजह से दिमाग शरीर की सामान्य संवेदनाओं को फोन के वाइब्रेशन समझ लेता है। हालांकि नोटिफिकेशन कम करके, बार-बार फोन चेक करने को लेकर खुद को कंट्रोल करने के अलावा तनाव को मैनेज करके इस आदत में सुधार किया  जा सकता है।

 

  • रिंग्जाइटी का एक ही कारण तय नहीं है। इसका संबंध फोन के लगातार इस्तेमाल, किसी कॉल या मैसेज का इंतजार और किसी चिंता की प्रतिक्रिया हो सकती है।
  • जिन लोगों को किसी व्यक्ति के जवाब, कॉल या संपर्क को लेकर ज्यादा चिंता रहती थी, उनमें यह अनुभव अधिक हो सकता है। 


रिंग्जाइटी को आमतौर पर गंभीर नहीं माना जाता है, पर अगर इसके कारण आपकी दिनचर्या में दिक्कत होने लगे या फिर काम बाधित होने लगे तो इस बारे में विशेषज्ञ की सलाह ले लें। संभव है कि इसके पीछे मेंटल हेल्थ की कोई और दिक्कत हो?

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