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भीड़ से दूर मनाना चाहते हैं छुट्टियां तो पहुंचें करसोग, यहां के रास्ते ही आपका दिल जीत लेंगे

Tue, 10 Sep 2019 02:15 PM IST
पंखुड़ी सिंह लाइफस्टाइल डेस्क
लाइफस्टाइल डेस्क Published by: पंखुड़ी सिंह Updated Tue, 10 Sep 2019 02:15 PM IST
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आज हम आपको भारत की उस जगह के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां देश-विदेश से लोग यहां की वादियों का आनंद उठाने के लिए आते हैं। लेकिन लोग सिर्फ कुल्लू, मनाली, शिमला, धर्मशाला, स्पीति वैली और तीर्थन वैली तक ही जाते हैं। ये सभी जगह खूबसूरत तो हैं, लेकिन इनसे अलग भी हिमाचल में एक ऐसी जगह है जहां जाकर आप जन्नत जैसा महसूस करेंगे। हिमाचल के इस कस्बे का नाम है 'करसोग'।

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वैसे तो 'करसोग' शहर मंडी जिले में आता है, लेकिन यह मंडी से 125 किमी की दूरी पर है। करसोग जाते समय आपको रास्ते में सेब, नाशपाती, चीड़, कैल और देवदार के पेड़ देखने को मिलेंगे। करसोग पहुंचना तो छोड़िए वहां का रास्ता ही आपका दिल जीत लेगा। इस रूट की सबसे अच्छी बात यह है कि दूसरे रास्तों की तरह यहां आपको भीड़ नहीं मिलेगी। करसोग पहुंचते ही बर्फ की चादर से लिपटे पहाड़ और वहां की हरियाली देखकर आपका रोम-रोम खिल उठेगा। अगर आप कुछ पल अपने साथ बिताना चाहते हैं, तो इससे अच्छी जगह नहीं हो सकती। 

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4,500 फीट की ऊचाई पर स्थित करसोग घाटी से जुड़ी कई सालों पुरानी कहानी है। इस घाटी का नाम दो शब्दों 'कर' और 'सोग' से जुड़कर बना है। इसका अर्थ है 'प्रतिदिन शोक'। महाभारत से जुड़ी इस कहानी के बारे में बताया जाता है कि इस गांव पर एक राक्षस का आतंक छाया था। वह हर दिन एक गांववासी को खाया करता है। इसलिए पूरे गांव में शोक छाया रहता था। भीन ने उस राक्षस को मारकर गांववालों की रक्षा की थी। 

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इस गांव में ठीक-ठाक आबादी है। यहां घूमने के लिए आप कमरूनाग मंदिर, शिखरी देवी मंदिर, कामाक्षा देवी और महुनाग का मंदिर जा सकते हैं। इसके अलावा आप यहां के बाजार भी घूमने जा सकते हैं, जहां हमेशा हलचल रहती है। यहां एक ममलेश्वर मंदिर भी है, जिसका संबंध पांडवों से बताया जाता है। कहा जाता है इस जगह पर पांडवों ने अज्ञातवास का कुछ समय बिताया था। 

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ममलेश्वर मंदिर में एक ढोल रखा है। कहा जाता है ये ढोल भीम का है। मंदिर में पांच शिवलिंग है, जिसकी प्रतिष्ठा पांडवों ने ही की थी। यहीं पर 200 ग्राम का एक गेहूं का दाना भी है, जो पांडवो का माना जाता है। इस मंदिर में एक धुना है। इस धुना से जुड़ी मान्यता है कि ये महाभारत काल से लगातार जल रहा है। जब भीम ने यहां के लोगों को राक्षस से मुक्ति दिलाई थी, तब इस धुना को जलाया गया था, जो आज तक जल रहा है। अगर आप ट्रेकिंग पसंद करते हैं तो आप करसोग से 22 कि.मी. दूर रोहांडा जा सकते हैं। यहां से कमरू नाग ट्रेक शुरू होता है। 

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