उम्र बढ़ना शरीर की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। उम्र के साथ आप मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से कमजोर होने लग जाते हैं। आमतौर पर 60 की उम्र के बाद चीजें याद रखने में थोड़ी ज्यादा मुश्किल होने लगती है, किसी का नाम तुरंत याद नहीं आता और एक साथ कई काम करने में पहले जैसी आसानी का अनुभव नहीं होता है। लेकिन हर भूलने की समस्या को बढ़ती उम्र का सामान्य असर मान लेना सही नहीं है।
काम की बात: उम्र बढ़ने पर भी दिमाग को रख सकते हैं जवान, पर कैसे? मिल गया इसका जवाब
उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त, सोचने और जानकारी को प्रोसेस करने की गति में बदलाव आ सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह अपरिहार्य नहीं माना जा सकता। नियमित एक्सरसाइज, अच्छी नींद, संतुलित खान-पान, मानसिक गतिविधियां ब्रेन हेल्थ बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। अध्ययनों में इसका एक असरदार तरीका बताया गया है।
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ब्रेन एट्रोफी की समस्या
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि उम्र बढ़ने के साथ मानव मस्तिष्क में धीरे-धीरे संरचनात्मक बदलाव आने लगते हैं। 40 वर्ष की आयु के बाद ये बदलाव अधिक स्पष्ट हो सकते हैं। इस प्रक्रिया को ब्रेन एट्रोफी या ब्रेन श्रिंकेज कहा जाता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक रूप से सक्रिय जीवनशैली और विशेष रूप से किसी संगीत वाद्य यंत्र को सीखना दिमागी क्षमता में गिरावट की रफ्तार को धीमा करने में मदद कर सकता है।
- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग सहित कई अन्य संस्थानों द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार उम्र बढ़ने के बावजूद मस्तिष्क में नई तंत्रिका कड़ियां बनाने की क्षमता बनी रहती है।
- संगीत सीखना दिमाग के कई हिस्सों को एक साथ सक्रिय करता है, इसलिए इसे फुल-ब्रेन वर्कआउट माना जाता है।
- मसलन अगर आप संगीत सीखते हैं और कोई वाद्य यंत्र बजाते हैं तो ये आपकी दिमागी क्षमता को बुढ़ापे में भी मजबूत बनाए रखने में मददगार हो सकती है।
म्यूजिक सीखने से याददाश्त और एकाग्रता से जुड़े हिस्से होते हैं सक्रिय
विशेषज्ञों के अनुसार जब आप पियानो, गिटार, तबला, वायलिन या अन्य वाद्य यंत्र सीखते हैं, तब दिमाग के कई हिस्से एक साथ काम करते हैं।
- हाथों और अंगुलियों की गतिविधि के लिए मोटर कॉर्टेक्स सक्रिय होता है। स्वर और ताल पहचानने के लिए ऑडिटरी सिस्टम काम करता है।
- याददाश्त और एकाग्रता से जुड़े हिस्से लगातार सक्रिय रहते हैं।
- भावनात्मक प्रतिक्रिया और रचनात्मकता भी इसमें शामिल होती है।
- यही कारण है कि संगीत प्रशिक्षण को मानसिक लचीलापन बढ़ाने वाली गतिविधियों में शामिल किया जाता है।
बढ़ती उम्र के साथ मस्तिष्क की कोशिकाओं के बीच संचार धीमा पड़ सकता है। विशेष रूप से स्मृति, निर्णय क्षमता और ध्यान नियंत्रित करने वाले हिस्सों में बदलाव देखे जाते हैं। एमआरआई अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि उम्र के साथ ग्रे मैटर और व्हाइट मैटर दोनों में धीरे-धीरे कमी आ सकती है। हालांकि वैज्ञानिक स्पष्ट करते हैं कि यह प्रक्रिया हर व्यक्ति में समान नहीं होती। जीवनशैली, शिक्षा, तनाव, सामाजिक सक्रियता और शारीरिक स्वास्थ्य जैसे कई कारक इसकी गति को प्रभावित करते हैं।
महिलाओं को जरूर जाननी चाहिए ये बातें
विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में भी उम्र बढ़ने के साथ दिमागी सिकुड़न की प्रक्रिया होती है, लेकिन रजोनिवृत्ति के बाद हार्मोनल बदलाव इसमें अतिरिक्त भूमिका निभा सकते हैं। विशेष रूप से एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर घटने से स्मृति और संज्ञानात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है।
हालांकि शोध यह भी बताते हैं कि नियमित मानसिक गतिविधियां, संगीत, योग, ध्यान और सामाजिक जुड़ाव महिलाओं में भी दिमागी स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मददगार हो सकते हैं।
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स्रोत:
Never too late to start musical instrument training: Effects on working memory and subcortical preservation in healthy older adults across 4 years
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