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पैसेंजर पैरेंटिंग: बच्चों के लिए सही नहीं माने जाते पैसेंजर पैरेंट्स! जानें इनके बारे में हर जानकारी
Mon, 07 Sep 2026 05:17 PM IST
Shruti Gaur
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Mon, 07 Sep 2026 05:17 PM IST
सार
Passenger Parenting: बच्चों की अच्छी या खराब परवरिश में सबसे बड़ा हाथ माता-पिता का होता है। ऐसे में अगर वो कुछ लापरवाही करते हैं, जो उससे बच्चों पर ही सीधा प्रभाव पड़ता है। यहां हम आपसे इसी बारे में बात करेंगे।
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पैसेंजर पैरेंट्स किसे कहते हैं?
- फोटो : AI
Passenger Parenting: बच्चों की परवरिश केवल उन्हें खाना खिलाने, पढ़ाई कराने या उनकी जरूरतें पूरी करने तक सीमित नहीं होती। बच्चे अपने माता-पिता के व्यवहार, बातचीत और रोजमर्रा की आदतों से भी बहुत कुछ सीखते हैं। ऐसे में माता-पिता की मौजूदगी के बावजूद अगर वे बच्चे की परवरिश में सक्रिय भूमिका नहीं निभाते, तो इसका असर बच्चे के व्यवहार और भावनात्मक विकास पर पड़ सकता है। इसी संदर्भ में आजकल ‘पैसेंजर पैरेंटिंग’ शब्द की चर्चा होती है।
पैसेंजर पैरेंट्स किसे कहते हैं?
- फोटो : AI
पैसेंजर पैरेंटिंग क्या है?
पैसेंजर पैरेंटिंग का मतलब ऐसी पैरेंटिंग से है, जिसमें माता-पिता बच्चे की जिंदगी का हिस्सा तो होते हैं, लेकिन उसकी परवरिश में सक्रिय रूप से शामिल नहीं होते। वे बच्चे की जरूरतों को पूरा करते हैं, लेकिन उसके साथ पर्याप्त समय बिताने, उसकी बात सुनने और उसके विकास में भागीदारी करने पर कम ध्यान देते हैं।
पैसेंजर पैरेंटिंग का मतलब ऐसी पैरेंटिंग से है, जिसमें माता-पिता बच्चे की जिंदगी का हिस्सा तो होते हैं, लेकिन उसकी परवरिश में सक्रिय रूप से शामिल नहीं होते। वे बच्चे की जरूरतों को पूरा करते हैं, लेकिन उसके साथ पर्याप्त समय बिताने, उसकी बात सुनने और उसके विकास में भागीदारी करने पर कम ध्यान देते हैं।
पैसेंजर पैरेंट्स किसे कहते हैं?
- फोटो : AI
बच्चों पर पड़ सकता है भावनात्मक असर
जब माता-पिता बच्चे की भावनाओं और परेशानियों पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते, तो बच्चा खुद को अकेला या अनदेखा महसूस कर सकता है। धीरे-धीरे वह अपनी बातें माता-पिता से साझा करने के बजाय दूसरों से बात करना पसंद कर सकता है।
जब माता-पिता बच्चे की भावनाओं और परेशानियों पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते, तो बच्चा खुद को अकेला या अनदेखा महसूस कर सकता है। धीरे-धीरे वह अपनी बातें माता-पिता से साझा करने के बजाय दूसरों से बात करना पसंद कर सकता है।
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पैसेंजर पैरेंट्स किसे कहते हैं?
- फोटो : AI
बच्चे को फैसले लेने में परेशानी
बच्चों को उम्र के अनुसार छोटे-छोटे फैसले लेने का मौका देना जरूरी होता है। अगर माता-पिता उनकी गतिविधियों में बिल्कुल शामिल नहीं होते, तो उन्हें सही दिशा और जरूरी मार्गदर्शन समय पर नहीं मिल पाता। इससे कई परिस्थितियों में निर्णय लेने का आत्मविश्वास प्रभावित हो सकता है।
बच्चों को उम्र के अनुसार छोटे-छोटे फैसले लेने का मौका देना जरूरी होता है। अगर माता-पिता उनकी गतिविधियों में बिल्कुल शामिल नहीं होते, तो उन्हें सही दिशा और जरूरी मार्गदर्शन समय पर नहीं मिल पाता। इससे कई परिस्थितियों में निर्णय लेने का आत्मविश्वास प्रभावित हो सकता है।
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पैसेंजर पैरेंट्स किसे कहते हैं?
- फोटो : AI
पढ़ाई और व्यवहार पर भी असर
बच्चे की पढ़ाई, दोस्तों, शौक और व्यवहार में बदलाव पर ध्यान देना पैरेंटिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर माता-पिता इन चीजों से लगातार दूर रहते हैं, तो बच्चे की किसी परेशानी का पता देर से चल सकता है।