अनेक कलाओं और संस्कृतियों से सजी भारत की धरती पर देखने को बहुत कुछ है, इतना कि उनके बारे में अभी आप जानते भी नहीं हैं। इन छिपी हुई खूबसूरत जगहों को देखने के लिए जरूरी है देश को 'एक्स्प्लोर' करना या घूमना। अगर हर बार उन्हीं जानी पहचानी जगहों पर छुट्टियां बिताने जाएंगे तो कैसे भारत घूम पाएंगे।ऐसे में आज हम आपको 'धरती पर जन्नत' कहे जाने वाले कश्मीर में छुट्टियां बिताने की सलाह देंगे। दरअसल, आज हम आपको भारत के तीन और कश्मीर के बारे में बताएंगे जो भले ही छोटे से गांव हैं लेकिन यहां की खूबसूरती बेजोड़ है इसलिए इनकी तुलना कश्मीर से की जाती है।
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करनी है धरती पर जन्नत की सैर तो कश्मीर नहीं, इस बार इन चार गांवों का तय करें सफर
Mon, 23 Sep 2019 04:46 PM IST
पंखुड़ी सिंह
लाइफस्टाइल डेस्क
लाइफस्टाइल डेस्क
Published by: पंखुड़ी सिंह
Updated Mon, 23 Sep 2019 04:46 PM IST
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मलाना
'मलाना' गांव हिमाचल की कुल्लू घाटी के उत्तर में पार्वती घाटी की हरी-भरी वादियों से ढका हुआ है। मलाना नदी के पास खूबसूरत पहाड़ियों के किनारे बसे इस गांव की खूबसूरती बेमिसाल है।यहां के अद्भुत नजारे यहां आपने वाले लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यहां आने वाले पर्यटक इस गांव के बाहर कैंप लगाकर रुकते हैं। यहां बाहरी लोगों को गांव में जाने और वहां की किसी चीज को छूने की मनाही होती है।
'मलाना' गांव हिमाचल की कुल्लू घाटी के उत्तर में पार्वती घाटी की हरी-भरी वादियों से ढका हुआ है। मलाना नदी के पास खूबसूरत पहाड़ियों के किनारे बसे इस गांव की खूबसूरती बेमिसाल है।यहां के अद्भुत नजारे यहां आपने वाले लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यहां आने वाले पर्यटक इस गांव के बाहर कैंप लगाकर रुकते हैं। यहां बाहरी लोगों को गांव में जाने और वहां की किसी चीज को छूने की मनाही होती है।
स्मित
मेघालय की राजधानी शिलांग से करीब 11 किलोमीटर दूर पहाड़ों पर बसा 'स्मित' गांव कुदरत की खूबसूरत चादर ओढ़े हुए नजर आता है। शहर के प्रदूषण से दूर स्मित की हवा में घुली शुद्धता और ताजगी आपके जीवन से तनाव को दूर कर देगी। यही वजह है कि इस गांव को प्रदूषण मुक्त गांव का दर्जा भी मिला हुआ है। स्मित गांव दिखने में इतना खूबसूरत है कि यहां के नजारे आपको हैरत में डाल देंगे। इस गांव में रहने वाले लोग सब्जी और मसाले की खेती करते हैं।
मेघालय की राजधानी शिलांग से करीब 11 किलोमीटर दूर पहाड़ों पर बसा 'स्मित' गांव कुदरत की खूबसूरत चादर ओढ़े हुए नजर आता है। शहर के प्रदूषण से दूर स्मित की हवा में घुली शुद्धता और ताजगी आपके जीवन से तनाव को दूर कर देगी। यही वजह है कि इस गांव को प्रदूषण मुक्त गांव का दर्जा भी मिला हुआ है। स्मित गांव दिखने में इतना खूबसूरत है कि यहां के नजारे आपको हैरत में डाल देंगे। इस गांव में रहने वाले लोग सब्जी और मसाले की खेती करते हैं।
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खोनोमा
प्रकृति से प्यार करने वाले लोगों को शायद ही इस बात का पता हो कि खोनोमा को एशिया का सबसे पहला हरा-भरा गांव घोषित किया गया है। ये गांव कोहिमा से 20 किलोमीटर दूर खोनोमा की वादियों में स्थित है। इस गांव में 100 से ज्यादा अलग-अलग प्रजाति के लोग रहते हैं। अगर आप गौर से इस गांव को देखेंगे तो पाएंगे कि खोनोमा में बना हर घर एक दूसरे से जुड़ा हुआ हैं। इसके अलावा यहां बने हर घर के दरवाजे पर एक खास तरह का सींग लटकाया जाता है। कहा जाता है कि गांववालों की सुरक्षा के लिए लटकाया गया है।य हां लगभग 250 पौधों की प्रजातियों के पौधे पाए जाते हैं।
प्रकृति से प्यार करने वाले लोगों को शायद ही इस बात का पता हो कि खोनोमा को एशिया का सबसे पहला हरा-भरा गांव घोषित किया गया है। ये गांव कोहिमा से 20 किलोमीटर दूर खोनोमा की वादियों में स्थित है। इस गांव में 100 से ज्यादा अलग-अलग प्रजाति के लोग रहते हैं। अगर आप गौर से इस गांव को देखेंगे तो पाएंगे कि खोनोमा में बना हर घर एक दूसरे से जुड़ा हुआ हैं। इसके अलावा यहां बने हर घर के दरवाजे पर एक खास तरह का सींग लटकाया जाता है। कहा जाता है कि गांववालों की सुरक्षा के लिए लटकाया गया है।य हां लगभग 250 पौधों की प्रजातियों के पौधे पाए जाते हैं।
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मिरिक
दार्जिलिंग के पश्चिम में समुद्र तल से लगभग 4905 फीट की ऊंचाई पर बसा एक छोटा सा गांव मिरिक है। हिमालय की वादियों के बीच देवदार से घिरी मिरिक झील यहां के नजारों को और भी खूबसूरत बना देती है। यहां चाय के बागान, जंगली फूलों की चादर, क्रिप्टोमेरिया के पेड़ आने वाले पर्यटकों को खासा लुभाते हैं।
दार्जिलिंग के पश्चिम में समुद्र तल से लगभग 4905 फीट की ऊंचाई पर बसा एक छोटा सा गांव मिरिक है। हिमालय की वादियों के बीच देवदार से घिरी मिरिक झील यहां के नजारों को और भी खूबसूरत बना देती है। यहां चाय के बागान, जंगली फूलों की चादर, क्रिप्टोमेरिया के पेड़ आने वाले पर्यटकों को खासा लुभाते हैं।