Tungnath Temple : सावन का पावन महीना शुरू हो रहा है। 4 जुलाई से सावन है जो कि रक्षाबंधन तक जारी रहेगा। सावन को भगवान भोलेनाथ की आराधना का पर्व माना जाता है। सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा होती है। श्रद्धालु शिव मंदिरों में दर्शन के लिए जाते हैं।
Tungnath Temple: दुनिया में सबसे अधिक ऊंचाई पर है भगवान शिव का तुंगनाथ मंदिर, जानें कैसे पहुंचेंगे आप
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तुंगनाथ मंदिर कहां है?
भगवान शिव का प्राचीन तुंगनाथ मंदिर उत्तराखंड के गढ़वाल के रुद्रप्रयाग जिले में ऊंचे पर्वत पर स्थित है। तुंगनाथ मंदिर महादेव के पंच केदारों में से एक है, जो चारों तरफ से बर्फ से ढका रहता है।
तुंगनाथ मंदिर का इतिहास
मान्यता है कि तुंगनाथ मंदिर को पांडवों ने भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए बनवाया था। कहा जाता है कि कुरुक्षेत्र में हुए नरसंहार को लेकर शिव जी पांडवों से नाराज थे, इसलिए उन्हें खुश करने के लिए इस सुंदर स्थान पर शिव शंभू का मंदिर बनवाया।
मां पार्वती ने की तपस्या
स्थानीय लोगों का कहना है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए इसी स्थान पर तपस्या की थी। मंदिर से जुड़ी एक कथा यह भी है कि भगवान राम ने रावण के वध के बाद स्वयं को ब्रह्महत्या के शाप से मुक्त करने के लिए इसी स्थान पर तपस्या की। इस कारण इस जगह को चंद्रशिला भी कहते हैं।
कैसे पहुंचे तुंगनाथ मंदिर
तुंगनाथ मंदिर पहुंचने के लिए यात्री उखीमठ के रास्ते जा सकते हैं, जहां उन्हें सड़क मार्ग के जरिए मंदाकिनी घाटी में प्रवेश करना होता है। आगे बढ़ने पर अगस्त्य मुनि नाम का एक छोटा कस्बा मिलता है, जहां से हिमालय की नंदा खाट चोटी देखने को मिलती है। इसके अलावा चोपता से तुंगनाथ मंदिर की दूरी महज तीन किलोमीटर है। बस से चोपता पहुंचकर मंदिर तक पैदल यात्रा कर सकते हैं।