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रामटेक मंदिर के दर्शन का बना सकते हैं प्लान, भगवान राम से जुड़ा है यहां का नाता
भारत में कई ऐसी जगह हैं, जहां हर साल लोग घूमने जाते हैं। हिल स्टेशन से लेकर यहां कई ऐसी जगह हैं, जहां लोग हर साल काफी संख्या में पहुंचते हैं। लोग इन जगहों पर समय बिताते हैं और अपने साथ कई अच्छी यादें लेकर घर लौटते हैं। भारत में ऐसी ही एक जगह है रामटेक मंदिर, जिसके बारे में आज भी लोग बेहद कम जानते हैं। तो चलिए आपको इस मंदिर के बारे में और यहां की खासियत के बारे में बताते हैं।
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ramtek temple
- फोटो : facebook/वैभवशाली वऱ्हाड
दरअसल, महाराष्ट्र के नागपुर से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर ये रामटेक मंदिर स्थित है। ये मंदिर भगवान श्रीराम का है। इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि जब राम जी वनवास पर थे, तब माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ उन्होंने इस जगह पर चार महीने तक समय बिताया था। यही नहीं, यहां माता सीता ने पहली रसोई भी बनाई थी, जहां से उन्होंने खाना बनाकर स्थानीय ऋषियों को भोजना कराया था। इस बात का वर्णन पद्मपुराण में भी मिलता है।
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ramtek temple
- फोटो : facebook/Ayan Banerjee
छोटी पहाड़ी पर बने रामटेक मंदिर को गढ़ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। वहीं, देखने में ये मंदिर कम और किला ज्यादा लगता है। मंदिर के निर्माण को लेकर कहा जाता है कि इसका निर्माण राजा रघु खोंले ने एक किले के रूप में करवाया था। मंदिर के परिसर में एक तालाब भी है, जिसे लेकर मान्यता है कि इसका पानी कभी ज्यादा या कम नहीं होगा।
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ramtek temple
- फोटो : facebook/Ayan Banerjee
यही नहीं, माना जाता है कि जब भी यहां बिजली चमकती है, तो मंदिर के शिखर पर ज्योति प्रकाशित होती है और इसमें श्रीराम का अक्स दिखाई देता है। यहां आपको बता दें कि रामटेक वही जगह है, जहां पर महाकवि कालिदास ने महाकाव्य मेघदूत लिखी थी। हर साल यहां काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, और ये जगह उन्हें सुकून देती है।
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ramtek temple
- फोटो : facebook/ সৌ র ভ
रामेटक में श्रीराम से ऋषि अगस्त्य मिले थे। इन्होंने ही भगवान राम को शस्त्रों का ज्ञान और साथ ही ब्रह्मास्त्र भी दिया था। इस ब्रह्मास्त्र की मदद से ही भगवान राम रावण का वध कर पाए थे। कहा जाता है कि ऋषि अगस्त्य ने रावण के अत्याचारों के बारे में भी भगवान राम को इसी जगह पर बताया था। इस जगह से लोगों की काफी आस्था जुड़ी हुई है।
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