कई अध्ययनों से ये स्पष्ट हो चुका है कि हम जो कुछ भी खाते-पीते हैं उसका सेहत पर सीधा असर होता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को डाइट में ऐसी चीजें अधिक से अधिक मात्रा में शामिल करने की सलाह देते हैं जिससे शरीर के लिए जरूरी अधिकतर पोषक तत्वों की आसानी से पूर्ति हो सके।
सेहत की बात: रिफाइंड ऑयल, सरसों का तेल या घी? अच्छी सेहत के लिए क्या सबसे बेहतर
क्या रिफाइंड तेल सच में नुकसानदायक है? क्या सरसों का तेल रोज इस्तेमाल किया जा सकता है? आइए जानते हैं कि रोजाना के इस्तेमाल के लिए कौन सा सबसे बेहतर है?
क्या कहती हैं विशेषज्ञ?
डायटीशियन पारुल शर्मा कहती हैं, असल में किसी भी तेल या वसा को पूरी तरह अच्छा या बुरा नहीं कहा जा सकता। सबसे जरूरी बात है कि उसमें किस तरह की वसा कितनी मात्रा में है और दिनभर में आप इसका इस्तेमाल कितनी मात्रा में कर रहे है।
- अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की साल 2026 की डाइट संबंधी सलाह में सैचुरेटेड फैट की जगह अनसैचुरेटेड वाली चीजों और तेलों को ज्यादा बेहतर बताया गया है।
- घी और मक्खन जैसे अधिक सैचुरेटेड फैट वाले खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल सीमित रखने की सलाह देती है।
- साथ ही खाना पकाने वाले तेल की मात्रा को नियंत्रित रखना जरूरी बताया गया है।
सरसों का तेल कितना फायदेमंद?
सरसों के तेल में अनसैचुरेटेड फैट के साथ ओमेगा-3 वसा का एक प्रकार भी पाया जाता है। भारतीय आहार संबंधी दिशा-निर्देशों में सरसों सहित अलग-अलग वनस्पति तेलों की संतुलित इस्तेमाल की सलाह दी जाती है। रोजाना के इस्तेमाल के लिए ये अच्छा विकल्प हो सकता है, पर डीप फ्राई चीजें से बचना चाहिए।
- आप अब तक महीने में जितनी मात्रा में तेल का इस्तेमाल करते रहे हैं उससे 10% कम तेल का सेवन करें।
क्या हर रिफाइंड तेल खराब होता है?
रिफाइंड शब्द सुनकर यह मान लेना सही नहीं कि हर रिफाइंड तेल स्वास्थ्य के लिए खराब है। अलग-अलग रिफाइंड वनस्पति तेलों की फैट संरचना अलग हो सकती है।
- रिफाइंड तेल को विभिन्न रासायनिक और भौतिक प्रक्रियाओं से गुजार कर उसकी अशुद्धियां दूर करके खाने योग्य बनाया जाता है। यह अधिक तापमान पर भी जल्दी जलता नहीं है, जिससे तलने में आसानी होती है।
- हालांकि इस तेल को तैयार करते समय उच्च तापमान और केमिकल प्रोसेस करने के कारण इसके प्राकृतिक गुण और विटामिन नष्ट हो जाते हैं। प्रक्रिया के दौरान बचे अवशेष स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं।
घी खाएं या नहीं
घी वर्षों से भारतीय भोजन का हिस्सा रहा है। घी में संतृप्त वसा अधिक होती है। आहार विशेषज्ञ घी और मक्खन जैसे हाई सैचुरेटेड फैट वाली चीजों सेवन कम करने की सलाह देते हैं।
- घी खाना पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है, बस इसका सीमित मात्रा में स्वाद के लिए सेवन करना अच्छा है। घी में चूंकि ब्यूटिरिक एसिड होता है जो आंतों की सेहत को सुधारता है और कब्ज से राहत देता है, इसलिए इसे आहार में शामिल किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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