आध्यात्म के जरिए न केवल आप खुद को ईश्वर के करीब महसूस करते हैं, बल्कि यह अपने आप को सकारात्मक ऊर्जा से भरने का भी जरिया होता है। आपने भी अपने माता-पिता, बच्चों, परिवार के साथ धार्मिक यात्राएं की होंगी। जरूरी नहीं कि आप कोई न कोई मन्नत लेकर ही धार्मिक जगहों की यात्रा करें, बल्कि कभी-कभी बिना कारण भी रोजमर्रा की जिंदगी से समय निकालकर धार्मिक यात्राएं करनी चाहिए। आइए, जानते हैं देश की ऐसी पांच धार्मिक जगहों के बारे में, जहां जाकर आपको पॉजिटिव एनर्जी से भर जाएंगे:
आपको पॉजिटिव एनर्जी से भर देंगी देश की ये 5 धार्मिक यात्राएं
माता वैष्णो धाम, जम्मू
जम्मू स्थित पहाड़ों की गोद में बसे पवित्र धाम वैष्णो देवी की यात्रा करने बड़ी संख्या में हिंदू धर्मावलंबी सालों भर जाते रहते हैं। मां वैष्णो देवी के लिए श्रद्धालुओं के मन में अलग ही आस्था होती है। फिर चाहे आपकी कोई मन्नत हो या फिर माता का दर्शन और आशीर्वाद लेना हो, मां के दरबार में लाखों लोग जाते हैं। कई बार ऐसा होता है कि हम सोचते रह जाते हैं, लेकिन प्लान नहीं बना पाते हैं। परिवार के साथ वैष्णो धाम की तीर्थयात्रा करना आपके लिए बेहतर अनुभव होगा।
मथुरा, उत्तर प्रदेश
अगर आपको भगवान कृष्ण का शहर देखना है तो मथुरा जरूर जाएं। मथुरा में यमुना नदी बहती है और इस पवित्र नदी पर 25 घाट बने हैं, लेकिन इन घाटों में सबसे ज्यादा महत्व विश्राम घाट का है क्योंकि यहां पर भगवान कृष्ण ने कंस को मारने के बाद विश्राम किया था। दुनियाभर से श्रद्धालु मथुरा आते हैं। यह मंदिरों का शहर है। यहां आप कृष्ण जन्मभूमि मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर, जामा मस्जिद, कुसुम सरोवर, राधा कुंड और कृष्ण किला देख सकते हैं।
वाराणसी
काशी विश्वनाथ की नगरी- वाराणसी। उत्तर प्रदेश का एक ऐसा शहर, जो भारतीय संस्कृति को समझने का एक अद्भुत माध्यम है। कभी देश के किसी हिस्से से कोई व्यक्ति यहां आकर बनारसी हो जाता है तो यहां आने वाले कई विदेशी भी यहीं के होकर रह जाते हैं। गंगा घाटों से लेकर विश्वनाथ मंदिर, सारनाथ, हनुमान मंदिर, भारत माता मंदिर समेत यहां कई जगहें हैं, जहां जाकर आप रिफ्रेश हो जाएंगे।फरवरी में प्लान बनाना चाहते हैं तो महाशिवरात्रि में यहां रहने का अलग ही अनुभव होगा।
वृंदावन
वृंदावन को प्रेम की नगरी कहा जाता है। कहा जाता है, यहां भगवान कृष्ण ने राधिका और गोपियों संग रास रचाया था। राधा—कृष्ण से संबंध बताने का यह मतलब नहीं कि धर्म में रुचि वाले ही यहां जाएं। आप धार्मिक हैं या नहीं, इससे फर्क नहीं पड़ता। दरअसल, फरवरी के अंत और मार्च की शुरुआत से वृंदावन में एक अलग ही रौनक होती है। इस सुहाने मौसम में वृंदावन घूमने का मजा ही कुछ और है।