कोरोना के कारण लंबा समय हो गया जब लोग अपने घरों से बाहर निकले ही नहीं है। साल के अंत तक युवा तो फिर भी एक बार को यात्राएं करने लगे हैं लेकिन बुजुर्ग घरों में रह-रहकर चिढ़चिढ़े हो चुके हैं। ऐसे में आवश्यकता है कि उनका हवा पानी बदला जाए, उन्हें पूरी सुरक्षा के साथ किसी नदी तट, मंदिर, आध्यात्मिक शांति वाले स्थान पर ले जाया जाए या फिर क्यों न उन्हें उनके गांव ही ले जाया जाए। हालांकि बुजुर्गों को यात्रा कराना इतना आसान नहीं होता है इसलिए बहुत जरूरी है कि आप अपने दादा-दादी, नाना- नानी या अन्य बड़ों को अपने साथ ले जा रहे हैं तो अगली स्लाइड्स में बताई गई बातों का विशेषकर ख्याल रखें नहीं तो संभव है कि आप रास्तेभर परेशान हो सकते हैं।
बुजुर्गों के साथ कर रहे हैं यात्रा तो इन बातों का रखें ख्याल, नहीं होना पड़ेगा रास्तेभर परेशान
पहले करा लें जांच
बुजुर्गों को यात्रा पर ले जाने से पहले बहुत जरूरी है कि आप उनका एक बार पूरे शरीर का चेकअप करा लें। उनका बीपी, शुगर आदि नॉर्मल होने पर ही उन्हें अपने साथ यात्रा के लिए ले जाएं अन्यथा वे भी रास्तेभर परेशान होंगे और आप भी चिंताग्रस्त हो जाएंगे। यदि शरीर में कुछ थोड़ी बहुत भी समस्या है तो आप दो-तीन दिन उसके सामान्य होने का इंतजार कर सकते हैं।
फर्स्ट एड बॉक्स
यात्रा के दौरान अपने साथ फर्स्ट एड बॉक्स जरूर रखें। उस बॉक्स में बड़ों की दवाइयों को एकदम व्यवस्थित ढंग से रखें। साथ में ओआरएस, इलेक्ट्रॉल आदि के पाऊच भी रखें ताकि इतने दिनों बाद यात्रा करने के कारण उन्हें बेचैनी या कमजोरी महसूस होती है तो आप तुरंत उन्हें ये घोलकर पिला सकें। दर्द निवारक स्प्रे आदि भी उस फर्स्ट एड बॉक्स में याद से रखें।
फल और सूखा नाश्ता
बुजुर्गों के मामले में आप बिल्कुल रिस्क नहीं ले सकते कि यात्रा के दौरान भूख लगने पर रास्ते में से कुछ भी लेकर खा लेंगे। सामान्य यात्रा में जरूर ऐसा कर सकते हैं लेकिन बुजुर्गों के साथ यात्रा के दौरान आपकी प्राथमिकता उनकी सेहत होती है। इसलिए आप कुछ फल और घर का बना सूखा नाश्ता अपने साथ जरूर रखें। ऐसा करने से उन्हें भूख से तो राहत मिलेगी ही साथ ही वे बीमार भी नहीं पड़ेंगे।
आरामदायक स्थान दें
सफर में जो सबसे आरामदायक स्थान है, वो घर के बड़े- बुजुर्गों के लिए सुनिश्चित करें। यदि आप खुद के वाहन से जा रहे हैं तब तो कोई समस्या ही नहीं है लेकिन यदि बस या ट्रेन की यात्रा है तो कोशिश करें कि उन्हें ऊपर की बर्थ आदि न मिले या उन्हें ऐसा स्थान मिले जहां वे आराम से पांव आदि लंबे करके बैठ सकें अन्यथा पूरी यात्रा के दौरीन उनके शरीर में दर्द बना ही रहेगा।