Varanasi Ganga Snan: प्रयागराज में महाकुंभ का भव्य आयोजन हुआ है, जिसमें हर दिन करोड़ों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और संगम में डुबकी लगा रहे हैं। महाकुंभ में इतनी बड़ी संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु और पर्यटकों के कारण प्रयागराज में काफी भीड़ हो गई है। इससे सड़क मार्ग और रेल मार्ग पर भी प्रभाव पड़ रहा है। प्रयागराज और आसपास के जिलों में फ्लाइट और ट्रेन के टिकट महंगे हो गए हैं। इसके अलावा कंफर्म टिकट भी नहीं मिल पा रहे हैं। सड़क मार्ग बाधित है। हालांकि ऐसा माहौल केवल प्रयागराज में नहीं बल्कि कुछ अन्य जगहों पर भी देखने को मिल सकता है। प्रयागराज से करीब बनारस है। बनारस गंगा तट के किनारे बसा शहर है। बनारस शहर में भगवान शिव की प्रिय नगरी काशी है, जहां वह काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के तौर पर विराजमान है।
Varanasi Ganga Snan: प्रयागराज जैसा माहौल बनारस में भी, गंगा स्नान के लिए जा रहे हैं तो रखें इन बातों का ध्यान
अगर आप बनारस जाने की योजना बना रहे हैं तो यहां बनारस यात्रा की पूरी जानकारी दी जा रही है। पूरी डिटेल जानकारी काशी यात्रा पर गए श्रद्धालु के अनुभव के आधार पर तैयार की गई है।
रेलवे स्टेशन को लेकर असमंजस
वाराणसी में मुख्य रुप से तीन रेलवे स्टेशन है। पहला वाराणसी जंक्शन, दूसरा बनारस रेलवे स्टेशन और तीसरा वाराणसी सिटी। इसमें लोग कंफ्यूज हो जाते हैं कि उनकी ट्रेन किस रेलवे स्टेशन पर है और उन्हें अपनी यात्रा कहां से शुरू करनी है। वाराणसी जंक्शन को कैंट रेलवे स्टेशन के नाम से जाना जाता है। अगर आप शहर में आटो या ई रिक्शा आदि ले रहे हैं तो कैंट बोलना ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है। वाराणसी रेलवे स्टेशन के लिए ट्रेन पर BSB लिखा होगा। वहीं बनारस रेलवे स्टेशन का नाम मंडुआडीह है। आपके रेल टिकट पर BSBS लिखा हो तो आप बनारस रेलवे स्टेशन पहुंचें।
रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी
बनारस रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग 6 किलोमीटर है, जहां पहुंचने में लगभग 50 मिनट का वक्त लग सकता है। वहीं कैंट रेलवे स्टेशन (वाराणसी जंक्शन) से लगभग 4 किमी दूर काशी विश्वनाथ मंदिर है। हालांकि मंदिर द्वार तक गाड़ियों का प्रवेश प्रतिबंधित है। विश्वनाथ गली तक पहुंचने के लिए कोई भी सड़क परिवहन पा सकते हैं।
कैसे पहुंचे मंदिर की गली तक?
काशी विश्वनाथ मंदिर सकरी गलियों के बीच बना है, जिसके एक ओर घाट और दूसरी ओर बनारस शहर बसा है। ऐसे में भीड़ की स्थिति यहां अधिक हो जाती है। वहीं मंदिर परिसर के इर्द-गिर्द बाजारें और दुकाने भी सजी हैं। भीड़ की स्थित और ट्रैफिक को देखते हुए मंदिर के पास तक गाड़ियों के आने की मनाही है। अगर आपको मंदिर जाना है तो ई-रिक्शा, टैक्सी या आटो से जा सकते हैं जो आपको मंदिर से लगभग 500 मीटर या एक किलोमीटर दूर चौराहे तक ही छोड़ेंगे। आगे का रास्ता आपको पैदल तय करना है।
काशी विश्वनाथ मंदिर का गेट
रेलवे स्टेशन से मंदिर तक आटो के जरिए आप गेट नंबर 1 या गेट नंबर 4 पर पहुंच सकते हैं। गेट नंबर एक गंगा घाट के नजदीक है। यहां से आप गंगा घाट पर पहुंच कर नाव से गंगा द्वार तक जा सकते हैं और इस गेट से एंट्री ले सकते हैं। गेट नंबर चार को विश्वनाथ द्वार कहा जाता है, जहां सबसे अधिक भीड़ हो सकती है।
गेट 4 के पास स्थित चौराहे तक आटो चालक पहुंचा देते हैं, यहां से 500 मीटर की दूरी तय करके आप मंदिर द्वार पर पहुंच सकते हैं। अंदर मंदिर परिसर में भी लंबी कतार देखने को मिलेगी। हालांकि प्रशासन की बेहतर व्यवस्था के कारण दर्शन में कठिनाई नहीं होती है।
काल भैरव के दर्शन
मान्यता है कि जो भी भक्त बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए आता है, उसे काल भैरव के दर्शन के लिए भी जरूर जाना चाहिए। काल भैरव मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर से 600 मीटर की दूरी पर है, जहां पैदल जाया जा सकता है। हालांकि भीड़ के कारण रूट डायवर्जन करके गली-गली होते हुए आपको मंदिर तक जाने को मिलेगा। इसलिए काल भैरव के दर्शन के लिए भी काफी चलना पड़ सकता है।
इसके अलावा आप संकट मोचन हनुमान मंदिर के दर्शन के लिए भी जा सकते हैं। हालांकि ये मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर और काल भैरव मंदिर से कुछ दूर है, जिसके लिए सार्वजनिक परिवहन से जा सकते हैं।
मंदिर में क्या सामान ले जा सकते हैं और क्या नहीं?
मंदिर में कुछ भी नहीं ले जा सकते हैं। मोबाइल, जूते, पेन, पान-मसाला समेत सभी सामान बाहर ही छोड़ना होता है। वहां चेकिंग के दौरान सारा सामान बाहर रखवा दिया जाता है। आप सिर्फ प्रसाद, दूध, गंगा जल, फूल आदि की टोकरी ले जा सकते हैं। इसके अलावा नकद रख सकते हैं।