Navratri 2022 Devi Shakti Peeth: चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 2 अप्रैल से हो रही है, जो 11 अप्रैल को समाप्त होंगे। नवरात्रि में मां के 9 रूपों की पूजा का विधान है। भक्त मां के पूजा-अर्चना और उपवास करते हैं। वहीं देवी मां के मंदिरों में जाकर उनके दर्शन करते हैं। नवरात्रि में माता के मंदिरों में बहुत भीड़ रहती है। माता के शक्तिपीठ धामों में भक्त दूर दूर से दर्शन करने पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, माता के 52 शक्तिपीठ हैं। यह शक्तिपीठ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी स्थित हैं। सभी शक्तिपीठों का विशेष महत्व है। आप आसानी से इन शक्तिपीठ धाम के दर्शन करने जा सकते हैं। बता दें कि माता सती के वियोग में भगवान भोलेनाथ माता सती का शव लेकर तांडव कर रहे थे, तभी भगवान विष्णु ने उन्हें रोकने के लिए सुदर्शन चक्र से माता सती के शव के टुकड़े कर दिए। माता सती के अंग और आभूषण जहां जहां गिरे, वह पवित्र शक्तिपीठ बन गए। अगर आप भारत के बाहर विदेशों में स्थित शक्तिपीठ धाम को देखना चाहते हैं तो यहां आपको विदेशों में बसे मां के शक्तिपीठ धाम के बारे में बताया जा रहा है।
Durga Shaktipeeths In Foreign: भारत ही नहीं विदेशों में भी स्थित हैं देवी के शक्तिपीठ, जानिए कहां कौन सी माता का मंदिर?
हिंगुला शक्तिपीठ, पाकिस्तान
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में देवी मां का हिंगुला शक्तिपीठ है। इस शक्तिपीठ को हिंगलाज देवी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, यहां माता सती का सिर गिरा था। माता के इस प्रसिद्ध शक्तिपीठ को नानी का मंदिर या नानी का हज भी कहा जाता है। कहते हैं कि यहां कई बार आतंकी आक्रमण भी हुए लेकिन शक्तिपीठ को कोई नुकसान नहीं हुआ।
मनसा शक्तिपीठ, तिब्बत
तिब्बत में मानसरोवर नदी के तट पर माता का पावन शक्तिपीठ स्थित है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, यहां माता सती की दाईं हथेली गिरी थी।
नेपाल शक्तिपीठ
आद्या शक्तिपीठ- बांग्लादेश की तरह की नेपाल में भी कई शक्तिपीठ हैं। नेपाल में गंडक नदी के पास आद्या शक्तिपीठ है। मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती का बायां गाल गिरा था। यहां माता देवी की गंडकी स्वरूप की पूजा होती है।
गुहेश्वरी शक्तिपीठ- 52 शक्तिपीठों में से एक गुहेश्वरी शक्तिपीठ है, जो पशुपतिनाथ मंदिर के कुछ दूरी पर बागमती नदी के किनारे स्थित है। धार्मिक मान्यता है कि यहां मां सती के दोनों जानु यानी घुटने गिरे थे। यहां शक्ति के महामाया रूप और भगवान शिव के भैरव कपाल रूप की पूजा होती है।
दंतकाली शक्तिपीठ- नेपाल के बिजयापुर गांव में माता सती के दांत गिरे थे। इस कारण इस शक्तिपीठ को दन्तकाली शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है।
इन्द्राक्षी शक्तिपीठ, श्रीलंका
श्रीलंका के जाफना नल्लूर में देवी का शक्तिपीठ है। यहां माता सती की पायल गिरी थी। इस शक्तिपीठ को इन्द्राक्षी कहा जाता है। मान्यता है कि देवराज इंद्र और भगवान राम ने माता के इस शक्तिपीठ की पूजा की थी।