Nainital Tourist Places: घूमने का शौक रखने वाले गर्मियों और सर्दियों, दोनों ही मौसम में हिल स्टेशन जाना पसंद करते हैं। दिल्ली एनसीआर के आसपास रहने वालों के लिए सबसे अधिक हिल स्टेशन के विकल्प उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में हैं, जो कम समय और बजट में घूमने के लिए सबसे बेहतरीन हो सकते हैं। इन्हीं सस्ते और सुंदर हिल स्टेशनों में नैनीताल का नाम आता है। नैनीताल पर्यटकों के बीच काफी मशहूर है। वीकेंड पर नैनीताल की ट्रिप पर जा सकते हैं। यहां के प्राकृतिक नजारे, पहाड़, हरियाली और झील आपका मन मोह लेगी। नैनीताल में घूमने के लिए कई पर्यटन स्थल हैं। अगर आपको ऐसा लगता है कि नैनीताल में केवल आपको झील देखने को मिलेगी तो आप गलत हैं। अप्रैल- मई के महीने में नैनीताल जाने की योजना है तो इस हिल स्टेशन के मशहूर पर्यटन स्थलों के बारे में जरूर जान लें। ये रहे नैनीताल के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल, जिन की सैर ट्रिप का मजा दोगुना कर देगी।
Nainital Tourist Places: अगर घूमने जा रहे हैं नैनीताल तो इन जगहों को करें लिस्ट में शामिल
इको केव गार्डन
नैनीताल में छह छोटी गुफाओं वाली एक प्रसिद्ध जगह है, इसे इको केव गार्डन कहते हैं। ये गुफाएं जानवरों के आकार की बनाई गई हैं। नैनीताल के मुख्य दर्शनीय स्थलों में से एक इको केव गार्डन में हिमालयी वन्य जीवों के प्राकृतिक वास की झलक देखने को मिल सकती है। इन छह गुफाओं में टाइगर केव, पैंथर केव, एप्स केव, बैट केव और फ्लाइंग फॉक्स केव घूम सकते हैं।
स्नो व्यू प्वाइंट
हिल स्टेशनों की सबसे खास बात होती है, वहां से दिखने वाले बर्फीली पहाड़ियां और हिमालयी सुंदरता। नैनीताल के स्नो व्यू प्वाइंट से पर्यटक ऊंचे बर्फीले पहाड़ और बादलों की सफेद चादर को करीब से देख पाएंगे। यहां फोटो क्लिक करा सकते हैं और दूध जैसी बर्फ से ढकी हिमालय की पहाड़ियों के नजारों को आंखों में समा सकते हैं।
टिफिन टाॅप
नैनीताल का टिफिन टाॅप समुद्र तल से 2292 मीटर ऊपर है। कुमाऊं की पहाड़ियां इस स्थान को घेरती हैं। टिफिन टाॅप चेर, ओक और देवदार के पेड़ों से घिरा है। यह एक मजेदार पिकनिक स्पॉट है, जहां एडवेंचर प्रेमियों को जरूर जाना चाहिए। आप टिफिन टाॅप तक पैदल या किराए के टट्टू के जरिए पहुंच सकते हैं।
नैना देवी मंदिर
नैनीताल की सबसे प्रसिद्ध जगहों में नैना देवी मंदिर हैं। मान्यता है कि यहां देवी सती के नेत्र गिरे थे, इसलिए इस मंदिर का नाम नैना देवी पड़ा। यह 52 शक्तिपीठों में से एक है। यहां पर पीपल का पेड़ शताब्दियों से लगा हुआ है, जहां लोग फेरी लेते हैं और मंदिर के दर्शन के लिए पैदल या उड़नखटोले के जरिए पहुंचते हैं।